बरेली में खाली घर में सामूहिक नमाज पर हंगामा, हिंदू पक्ष का विरोध; कहा- नई परंपरा स्वीकार नहीं
बरेली में खाली पड़े घर में सामूहिक नमाज को लेकर विवाद गहरा गया है. पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया है. हिंदू समुदाय इसे नई परंपरा बताकर विरोध कर रहा है. जबकि मुस्लिम समुदाय नमाज पर पाबंदी को अन्याय मान रहा है. टीवी9 की ग्राउंड रिपोर्ट में दोनों पक्षों की शिकायतें और तनाव सामने आया है.
बरेली के बिशारतगंज थाना क्षेत्र के मोहम्मदगंज गांव में शुक्रवार को एक खाली पड़े घर में सामूहिक नमाज पढ़े जाने पर विवाद हो गया. हिंदू समुदाय ने इसे अवैध बताया और आरोप लगाया कि खाली मकान को अस्थायी मदरसा बनाकर नमाज अदा की जा रही थी. मुस्लिम पक्ष ने गांव में मस्जिद न होने के कारण मजबूरी में नमाज पढ़ने की बात कही.
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति भी जताई, लेकिन नमाज पढ़ने वालों ने उनकी बात नहीं मानी. जिसके बाद हिंदू समुदाय के तेजपाल नाम के व्यक्ति ने पुलिस से शिकाय की. बिशारतगंज पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए 12 लोगों को हिरासत में ले लिया. हालांकि, शनिवार को सभी लोगों को मजिस्ट्रेट से जमानत मिल गई.
गांव में नई धार्मिक परंपरा डाली जा रही- हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष का कहना है कि गांव में नई धार्मिक परंपरा डाली जा रही है. 30 साल पहले हमारे दोनों समुदायों के बीच एक समझौता हुआ था. इसके तहत गांव में ना ही कोई मस्जिद मदरसा और ना ही कोई मंदिर बनाया जाएगा. हालात यह है कि अभी तक गांव में ना ही कोई मस्जिद है ना ही कोई मदरसा है ना ही कोई मंदिर है.
वहीं, मकान की मालकिन ने बताया कि उनकी अनुमति के बिना घर में नमाज हुई. इस बीच घर में नवाज पढ़ने का वीडियो भी समाने आ गया. पूरे मामले में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच में विवाद खड़ा हो गया है. वहीं, पुलिस ने साफ कहा है कि अगर बिना अनुमति की नमाज अदा की तो फिर से कार्रवाई की जाएगी.
मुस्लिम समुदाय घर को अस्थाई मदरसा बना देते हैं
TV9 की टीम ने बरेली से 50 किलोमीटर दूर गांव में ग्राउंड जीरो पर जाकर देखा. मोहम्मदगंज गांव के हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय घर को अस्थाई मदरसा बना देते हैं, हम गांव में नई परंपरा नहीं डालने देंगे. इसी बात की हमने पुलिस में शिकायत की. जब मौके पर पुलिस पहुंची तो तमाम लोगों को नमाज पढ़ते हुए गिरफ्तार भी किया.
30 साल पहले हमारे दोनों समुदायों के बीच समझौता के बाद ये लोग पास के गांव में जाकर अपनी नमाज अदा करते थे. अब कुछ दिन से यह गांव में भी खाली घरों में सामूहिक नवाज अदा कर रहे हैं. वहीं, जब मकान की मालकिन से पूछा तो उनका कहना है कि मेरे बिना पूछे ही घर में जाकर नमाज पढ़ने लगे थे. मैंने किसी को नहीं बुलाया था मैं घर में नहीं थी.
हमारी नवाज पर पाबंदी लगाई जा रही, यह अन्याय
मकान की मालकिन बुजुर्ग और विधवा है. वह घर में अकेली ही रहती है. वहीं मुस्लिम समुदाय का कहना है कि गांव में कोई भी मस्जिद और मदरसा नहीं है. हम पहले भी खाली मकान में उसके मालिक से पूछ कर सामूहिक रूप से नवाज अदा करते थे. अब जब हम एक घर में नमाज पढ़ रहे थे तो हिंदू समुदाय के लोगों ने पुलिस को बुला लिया.
पुलिस ने हम लोगों को गिरफ्तार करके थाने ले गई और हमारा चालान कर दिया. उनका कहना है कि हमारी नवाज पर पाबंदी लगाई जा रही है यह बिल्कुल ही गलत है. हमारे साथ में अन्याय किया जा रहा है जब गांव में कोई मस्जिद नहीं है तो हम कहां नमाज अदा करेंगे. पुलिस ने चेतावनी दी कि हिंदू समुदाय नहीं कह रहे हैं तो किसी घर में सामूहिक नवाज नहीं पढ़ोगे.