‘सभी पक्षों को भरोसे में लेना चाहिए था’, UGC नियम पर लगी रोक को मायावती ने बताया सही

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है. कोर्ट ने माना की UGC के जाति संबंधी नियम अस्पष्ट हैं, इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. वहीं, बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उचित ठहराया है.

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो) Image Credit: PTI

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर रोक लगा दी है. अदालत ने माना कि UGC के जाति संबंधी नियम अस्पष्ट हैं, इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. इस फैसले से विश्वविद्यालयों में पैदा हुआ सामाजिक तनाव फिलहाल टल गया है. इस बीच बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की प्रतिक्रिया सामने आई है.

पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है. उनका कहना है कि इस मामले में सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा ही नहीं होता, अगर UGC नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती.’ फिलहाल, 2012 के UGC के रेगुलेशन जारी रहेंगे, सुप्रीम कोर्ट इसपर 19 मार्च को अगली सुनवाई करेगा.

‘जांच कमेटी में समाज को प्रतिनिधित्व देना चाहिए’

बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘UGC द्वारा देश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है. ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता, अगर UGC नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती.’

SC की बात तो सबको स्वीकार करनी होगी- अखिलेश

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी UGC के नियमों पर सुप्रीक कोर्ट की रोक के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि हमारा तो संविधान कहता है कि हम कहीं भेदभाव नहीं कर सकते है. सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, कोर्ट यही सुनिश्चित करता है. क़ानून की भाषा भी साफ़ होनी चाहिए और भाव भी.

उन्होंने एक्स पर लिखा कि, ‘बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है. न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी हो.’ अखिलेश यादव ने साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बात तो सबको स्वीकार करनी होगी. निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होने चाहिए और दोषी बचने नहीं चाहिए.

‘हम अमेरिका जैसे पृथक विद्यालयों में नहीं जाएंगे’

UGC के नए नियमों पर रोक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में वकील विनीत जिंदल ने जनहित याचिका (PIL) दायर की थी. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने गुरुवार को इसपर सुनावाई की. सीजेआई ने कहा कि प्रथम दृष्टया हम कह सकते हैं कि विनियमन की भाषा अस्पष्ट है, विशेषज्ञों को जांच करने की आवश्यकता है ताकि इसका दुरुपयोग न हो.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया और याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने को कहा. साथ ही एक समिति गठित कर, इन नियमों के प्रावधानों की जांच का आदेश दिया. जस्टिस बागची ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि हम अमेरिका जैसे पृथक विद्यालयों में नहीं जाएंगे, जहां अश्वेत और श्वेत अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे.

भारत की एकता एजुकेशनल संस्थानों में दिखनी चाहिए-CJI

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत की एकता हमारे एजुकेशनल संस्थानों में दिखनी चाहिए. आप स्कूलों, कॉलेजों को अलग-थलग नहीं रख सकते, अगर कैंपस के अंदर ऐसा माहौल होगा तो लोग कैंपस के बाहर कैसे आगे बढ़ेंगे. हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए, जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए.

Follow Us