बदायूं दरोगा सुसाइड: इंसपेक्टर शाहिद पर तिलक लगाने के लिए प्रताड़ित करने का आरोप

बदायूं में दरोगा मेघश्याम गौतम 4 जून को मधुबनी कॉलोनी स्थित अपने किराए के कमरे में मृत पाए गए थे.उनका शव फंदे से लटका मिला था. अब इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे पुलिस विभाग में हलचल मच गई है.दर्ज एफआईआर के मुताबिक इंस्पेक्टर शाहिद अली कथित तौर पर दरोगा मेघश्याम गौतम को माथे पर तिलक लगाने और धार्मिक प्रवृत्ति को लेकर लगातार प्रताड़ित करते थे.

बदायूं दरोगा सुसाइड

बदायूं में न्यायालय सुरक्षा में तैनात दरोगा मेघश्याम गौतम की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ते जा रहा है.मृतक दरोगा के भाई रामेश्वर दयाल की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में न्यायालय सुरक्षा प्रभारी इंस्पेक्टर शाहिद अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.दर्ज एफआईआर में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

दरोगा मेघश्याम गौतम 4 जून को मधुबनी कॉलोनी स्थित अपने किराए के कमरे में मृत पाए गए थे.उनका शव फंदे से लटका मिला था.घटना के बाद से ही परिवार लगातार इसे मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा मामला बता रहा था.अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे पुलिस विभाग में हलचल मच गई है.

‘तिलक’ और धार्मिक पहचान को लेकर अपमानित करने के आरोप

दर्ज एफआईआर के मुताबिक इंस्पेक्टर शाहिद अली कथित तौर पर दरोगा मेघश्याम गौतम को माथे पर तिलक लगाने और धार्मिक प्रवृत्ति को लेकर लगातार प्रताड़ित करते थे.परिवार का आरोप है कि उनसे “बहुत हिंदू बनता है” और “तिलक लगाता है” जैसे शब्द कहकर अपमानजनक टिप्पणियां की जाती थीं.

एफआईआर में दावा किया गया है कि इस तरह की धार्मिक टिप्पणियों और मानसिक दबाव के चलते दरोगा लंबे समय से तनाव में थे.परिजनों के अनुसार मेघश्याम कई बार फोन पर और घर आने के दौरान अपनी परेशानी साझा कर चुके थे.

गलत ड्यूटी, गाली-गलौज और झूठे केस में फंसाने की धमकी का आरोप

एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि इंस्पेक्टर द्वारा दरोगा को कथित तौर पर परेशान करने के उद्देश्य से गलत तरीके से ड्यूटी लगाई जाती थी.इसके अलावा गाली-गलौज करने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं.परिवार का कहना है कि लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न ने मेघश्याम गौतम को पूरी तरह तोड़ दिया था, जिसके चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया.

शव मिलने के बाद भी उठे कई सवाल

परिजनों का आरोप है कि जब उन्हें घटना की सूचना मिली और वह मौके पर पहुंचे, तब तक शव को कमरे से हटाकर जिला अस्पताल की मोर्चरी भेजा जा चुका था.परिवार का कहना है कि उन्हें घटनास्थल की वास्तविक स्थिति तक नहीं दिखाई गई.

मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग में अंदरखाने चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.धार्मिक टिप्पणी, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे आरोपों ने पूरे प्रकरण को गंभीर बना दिया है.फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी.

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