वर्चस्व की जंग में नीरजा ने काटी थी पूंछ, 52 दिन बाद जिंदगी की जंग हार गई राधिका; इटावा सफारी में मातम

इटावा सफारी की शेरनी राधिका 52 दिन के इलाज के बाद जिंदगी की जंग हार गई. वर्चस्व की लड़ाई में नीरजा ने उसकी पूंछ काट ली थी, जिससे हुए गंभीर संक्रमण ने उसकी जान ले ली. लगातार इलाज के बावजूद उसका वजन बहुत कम हो गया और मल्टी ऑर्गन फेलियर से उसकी मौत हुई. वन्यजीव प्रेमियों और सफारी प्रबंधन में शोक है.

इटावा सफारी पार्क

उत्तर प्रदेश इटावा सफारी पार्क में की शेरनी आखिरकार 52 दिनों के इलाज के दौरान जिंदगी की जंग हार गई. वर्चस्व की लड़ाई में जख्मी हुई राधिका ने सोमवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. लंबे उपचार के दौरान राधिका बेहद कमजोर हो गई थी. सफारी प्रशासन के अनुसार उसका वजन पहले करीब 78 से 80 किलोग्राम था. सोमवार को मौत के बाद पोस्टमार्टम के दौरान उसका वजन महज 57 किलोग्राम पाया गया.

राधिका की मौत की खबर फैलते ही वन्य जीव प्रेमियों और सफारी प्रबंधन में शोक की लहर दौड़ गई. बता दें कि बीते 8 जुलाई को राधिका की पार्क में रह रही दूसरी शेरनी नीरजा से लड़ाई हो गई थी. इस दौरान नीरजा ने राधिका की पूंछ काट ली थी. आनन फानन में उसका उपचार शुरू किया गया, लेकिन संक्रमण फैलता चला गया. इसी संक्रमण की वजह से राधिका ने 52 दिन चले उपचार के बाद सोमवार को दम तोड़ दिया.

मथुरा के डॉक्टर भी नहीं बचा पाए जान

सफारी पार्क प्रशासन के अनुसार इस घटना के बाद पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, मथुरा से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया गया. उनके निर्देशन में सफारी के वन्यजीव चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया और लगातार उसकी निगरानी की गई. इस दौरान राधिका का व्यवहार भी सामान्य नहीं रहा. 9 जुलाई को उसने खुद कई बार अपनी पूंछ काट ली. इसके अलावा वह उपचार के दौरान तीन बार अपनी पूंछ पर बैठ गई, जिससे लगे टांके टूट गए.

काटनी पड़ी थी पूंछ

सफारी प्रशासन के मुताबिक पूंछ में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर राधिका की पूंछ को काटकर छोटा किया गया था. लेकिन संक्रमण बढ़ता ही गया. इसकी वजह से उसका वजन करीब 21 से 23 किलोग्राम कम हो गया. मौत की सूचना प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उत्तर प्रदेश, लखनऊ को दी गई. उनके निर्देश पर पशु चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया. पैनल की प्रथम दृष्टया रिपोर्ट में अत्यधिक कमजोरी और मल्टी ऑर्गन फेलियर से मौत की बात कही गई है.

पेट और आंत में मिली गैस

पोस्टमार्टम के दौरान राधिका के पेट और आंतों में अत्यधिक मात्रा में हवा और गैस भरी मिली. मृत्यु के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित कर इसे जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजा जा रहा है. बताया जा रहा है कि राधिका को वर्ष 2019 में गुजरात से इटावा सफारी पार्क लाया गया था. सफारी प्रशासन के अनुसार उसकी शारीरिक अक्षमता और असामान्य व्यवहार के कारण उसे कभी पर्यटकों के सामने सफारी क्षेत्र में नहीं खोला गया. उसका इस्तेमाल प्रजनन के लिए भी नहीं किया जा रहा था. यही वजह है कि 9 वर्ष की होने के बाद भी वह कभी मां नहीं बनी.

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