एक ओर बेटी की अंतिम विदाई, दूसरी ओर बेटे का जन्म… गोरखपुर रेप-मर्डर की दर्दनाक कहानी
गोरखपुर में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में गुरुवार शाम करीब छह बजे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया. परिवार अभी इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि करीब तीन घंटे बाद उसकी मां ने एक बेटे को जन्म दिया. परिवार का कहना है कि मासूम बच्ची लंबे समय से छोटे भाई की इच्छा जताती थी और इस बार रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधने का सपना देखती थी, जो अब हमेशा के लिए अधूरा रह गया.
गोरखपुर में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. गुरुवार शाम करीब छह बजे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया. परिवार अभी इस असहनीय दुख से उबर भी नहीं पाया था कि करीब तीन घंटे बाद उसकी मां ने एक बेटे को जन्म दिया. नवजात को देखते ही मां और बहनों की आंखों से आंसू छलक पड़े. परिवार का कहना है कि बच्ची लंबे समय से भाई की इच्छा जताती थी.
मामले में गिरफ्तार आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को पुलिस ने बर्खास्त कर दिया है. उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की भी तैयारी शुरू कर दी है. बच्ची के अंतिम संस्कार के कुछ ही घंटे बाद मां ने अस्पताल में बेटे को जन्म दिया. परिवार के लोगों ने बताया कि बच्ची हमेशा कहती थी कि इस बार रक्षाबंधन पर वह अपने छोटे भाई को राखी बांधेगी.
अंतिम विदाई के बाद जन्मा बेटा, परिवार का दर्द और बढ़ा
बड़ी बहन ने बताया कि उसकी छोटी बहन अक्सर मां से कहती थी कि उसे एक भाई चाहिए. वह डॉक्टर बनकर मां का इलाज करने का सपना भी देखती थी. परिवार का कहना है कि उसकी हर इच्छा अब अधूरी रह गई. पुलिस के अनुसार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है. जांच अधिकारियों का कहना है कि बच्ची के साथ अत्यधिक हिंसा की गई थी. शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें मिलीं और मृत्यु डूबने तथा दम घुटने के कारण हुई.
अस्पताल से किया था अपहरण
जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश की. पुलिस पूरे घटनाक्रम की फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है. पुलिस जांच के अनुसार 28 जुलाई की रात बच्ची जिला अस्पताल में अपनी बड़ी बहन से मिलने गई थी, जो इलाज के लिए भर्ती थी. इसी दौरान आरोपी सिपाही की नजर उस पर पड़ी. आरोप है कि उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया.
आरोपी सिपाही बर्खास्त, NSA लगाने की तैयारी
करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और तकनीकी जांच के बाद पुलिस आरोपी तक पहुंची. 29 जुलाई को उसे हिरासत में लिया गया. उसकी निशानदेही पर लगभग 36 घंटे बाद बच्ची का शव बरामद किया गया. गोरखपुर के एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.
पत्नी बोली- ऐसा अपराध माफ करने योग्य नहीं
आरोपी सिपाही की पत्नी ने कहा कि उसके पति ने ऐसा अपराध किया है जिसे कभी माफ नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इस घटना ने उनका सिर शर्म से झुका दिया है. उनकी भी एक बेटी है और अब वह आरोपी के साथ कभी नहीं रहेंगी. पत्नी ने बताया कि पति के व्यवहार के कारण वह पहले से ही बच्चों के साथ मायके में रह रही थीं.
परिवार ने की न्याय की मांग
पीड़ित बच्ची के परिवार ने सरकार से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की है. परिजनों का कहना है कि उनकी बच्ची अब कभी वापस नहीं आएगी, लेकिन यदि दोषी को कठोरतम सजा मिलती है तो समाज में ऐसा अपराध करने वालों के लिए एक सख्त संदेश जाएगा.
कैसे सामने आया पूरा मामला
पीड़ित परिवार मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है और पिछले चार साल से गोरखपुर में किराए के मकान में रह रहा है. परिवार का पालन-पोषण बच्ची के पिता ई-रिक्शा चलाकर करते हैं. 27 जुलाई को बच्ची की बड़ी बहन की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अगले दिन छोटी बच्ची उसके लिए खाना लेकर अस्पताल पहुंची थी. वहीं से उसके लापता होने के बाद परिवार ने तलाश शुरू की. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर आरोपी सिपाही को गिरफ्तार किया और पूरे मामले का खुलासा किया.
