अब न्यूक्लियर पावर से दौड़ेंगी ट्रेनें, रूस की कंपनी ने दिया गोरखपुर में 50 मेगावाट का रिएक्टर प्लांट लगाने का प्रस्ताव

रेलवे अब न्यूक्लियर पावर के जरिए ट्रेनों का संचालन करने की तैयारी में है. इसके लिए रूस की फायरवुड नाम की कंपनी ने गोरखपुर के गीडा में 50 मेगावाट का पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव भी दिया है. जल्द इसे मंजूरी भी मिल सकती है.

न्यूक्लियर पावर से दौड़ेंगी ट्रेनें Image Credit:

अब ट्रेनों को न्यूक्लियर पावर के जरिए चलाया जाएगा. इसको लेकर रूस की कंपनी रोसाटॉम की सहयोगी कंपनी फायरवुड ने एनईआर को एक प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव के तहत ट्रेनों के संचालन के लिए न्यूक्लियर पावर के जरिए बिजली दी जाएगी. पहले फेज में 50 मेगावाट की क्षमता का रिएक्टर लगाने की बात भी चल रही है.

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर के जरिए ट्रेनों को दी जाएगी बिजली

इस प्रस्ताव के मुताबिक स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) से बिना किसी रुकावट के लगातार बिजली मिलती रहेगी. इसके जरिए 40 से 50 ट्रेनों का निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति की जा सकती है, जिससे उनका संचालन जारी रहे. इस प्रस्ताव के अनुसार न्यूक्लिय पावर से ट्रेनों को बिजली सप्लाई में कट या ट्रिप जैसी स्थिति आने की भी आशंका नहीं रहेगी.

इको फ्रेंडली होगा प्लांट

रेलवे से सेवानिवृत्ति और फायरवुड ने सिविल वर्क के लिए कंपनी ने एलएंडटी के साथ एमओयू किया है. रोसाटॉम और फायरवुड के सलाहकार जीएन सिंह राठौर ने बताया कि हम जिस प्लांट को लगाने का प्रस्ताव दे रहे हैं, वह पूरी तरह इको फ्रेंडली होगा. कोयला और अन्य प्रदूषण वाली वस्तुएं इसमें शामिल नहीं होंगी.

गोरखपुर के गीडा में प्लांट लगाने का प्रस्ताव

जीएन सिंह राठौर ने आगे कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी ग्रीन एनर्जी की दुनिया में सबसे अधिक सुरक्षित मानी जाती है. प्लांट लगने पर 500 लोगों को डायरेक्ट और 1500 से अधिक लोगों को इनडायरेक्ट तौर पर रोजगार भी मिलेगा. हमने गोरखपुर के गीडा में पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव भी दिया है. प्रोजेक्ट की डिटेल गीडा सीइओ को भेजा जा चुका है. उम्मीद है जल्द इसपर मंजूरी मिल सकती है.

क्या होता है स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर

स्मॉल माड्यूलर रिएक्टर 30 से 300 मेगावाट क्षमता होता है. इन्हें कारखानों में घटकों के रूप में बनाया जाता है. फिर बाद में साइट पर लाख असेंबल किया जाता है. इस प्रक्रिया की खास बात ये है कि इसमें रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.

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