हरदोई शिक्षा विभाग में बड़ा खेल! 61 शिक्षकों की फाइलें गायब, BSA पर रिश्वतखोरी का मुकदमा
हरदोई का बेसिक शिक्षा विभाग इन दिनों दो बड़े मामलों को लेकर सुर्खियों में है. एक तरफ 61 शिक्षक भर्ती से जुड़ी 61 फाइलें भी गायब मिली है. दूसरी तरफ BSA पर रिश्वतखोरी का आरोप है. जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले में BSA के खिलाफ रिश्वतखोरी का मुकदमा भी दर्ज हुआ है.
हरदोई के बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है. पिछले दो दिनों से इसको लेकर हड़कंप मचा है. 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़ी 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली है. वहीं, एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी का भी आरोप है. जिलाधिकारी के निर्देश पर BSA के खिलाफ रिश्वतखोरी का मुकदमा भी दर्ज हुआ है.
एजुकेटर भर्ती कराने वाली संस्था की शिकायत पर BSA डॉ. अजित सिंह के खिलाफ कोतवाली शहर में FIR दर्ज किया गया है. आरोप है कि फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी. जांच की गई तो बीएसए कार्यालय में कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए. जिसके बाद भर्ती संबंधी अलमारियां और दो कक्ष सील कर दिए गए हैं.
जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन
दरअसल, जिलाधिकारी अनुनय झा ने इस मामले में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया. जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह शामिल हैं. जांच समिति शनिवार को BSA कार्यालय पहुंची. टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच की, जिसमें कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए.
जांच के दौरान शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख रिकॉर्ड से गायब मिली हैं. इसके बाद भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि कुछ दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका है, जिसकी अलग से जांच कराई जाएगी. यह विभाग में व्याप्त धांधली की ओर इशारा करते हैं.
विभाग रडार पर, पटल प्रभारी-BSA पर FIR
इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ कल FIR दर्ज कराई जा चुकी है. खास बात यह है कि एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी भी अनुपम मिश्रा के पास ही थी. ऐसे में दोनों मामलों के तार एक ही दफ्तर और एक ही व्यवस्था से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं. अब सवाल है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड कैसे गायब हुए और इसके पीछे कौन है?
उधर एजुकेटर भर्ती कराने वाली आउटसोर्सिंग संस्था उज्ज्वला सेवा संस्थान की शिकायत ने पूरे मामले को और विस्फोटक बना दिया है. आरोप लगाया गया है कि बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी और बाद में दो लाख रुपये लेने का भी दावा किया गया है. पुलिस ने बीएसए डॉ. अजीत सिंह पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
एक तरफ गायब फाइलों का रहस्य है, दूसरी तरफ भर्ती में कथित धांधली और रिश्वतखोरी के आरोप. ऐसे में हरदोई का शिक्षा विभाग अब जांच एजेंसियों के रडार पर है. सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच की आंच आखिर कहां तक पहुंचती है?
