नोएडा एयरपोर्ट के कार्यक्रम में न्योते पर किचकिच, आपस में लड़ बैठे BJP नेता; हाईकमान तक पहुंचा मामला
नोएडा एयरपोर्ट के कार्यक्रम में निमंत्रण न मिलने से भाजपा नेताओं में भारी नाराजगी है. गौतम बुद्ध नगर के सांसद, विधायक समेत कई पदाधिकारियों को न्योता नहीं भेजा गया था. यह मामला पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है, जिसने हस्तक्षेप करते हुए पूरी रिपोर्ट तलब की है. प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह जांच कर 23 जून को मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेंगे.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली उड़ान का कार्यक्रम भले ही सफल हो गया, लेकिन इसी कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी के अंदर महाभारत शुरू हो गई है. इस कार्यक्रम में न्योता नहीं मिलने को लेकर पार्टी के सासंद, विधायक एवं कई अन्य पदाधिकारी नाराज हो गए हैं. मामला इतना बढ़ गया है कि पार्टी हाईकमान तक को इसमें दखल देनी पड़ी है. अब केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है.
जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉक्टर महेश शर्मा, राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर, दादरी विधायक तेजपाल नागर, क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया, भाजपा जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, विधानसभा परिषद सदस्य नरेंद्र भाटी और श्रीचंद शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों को न्योता नहीं भेजा गया था. इससे नाराज नेताओं ने पार्टी हाई कमान को शिकायत भेजी है. वहीं क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया मुख्यमंत्री को इस इस पूरे मामले से अवगत कराया है.
हाईकमान ने दी दखल
न्योते को लेकर शुरू हुई किचकिच का मामला सामने आने के बाद पार्टी हाईकमान ने मामले में दखल देते हुए रिपोर्ट तलब की है. यह जिम्मेदारी जिले के प्रभारी मंत्री को दी गई है. वह जांच के बाद मुख्यमंत्री व केंद्रीय नेतृत्व को पूरे मामले से अवगत कराएंगे. पार्टी के निर्देश पर प्रभारी मंत्री बृजेश सिंह ने जांच भी शुरू कर दी है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर केंद्रीय राज्य मंत्री के आगमन से जुड़ा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
23 को पेश होगी रिपोर्ट
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट का था. अब विवाद पैदा हुआ है तो वह जनप्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और रिपोर्ट बनाकर लखनऊ में 22 से 23 जून को मुख्यमंत्री के समक्ष पेश करेंगे. बताया जा रहा है कि यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की ओर से जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण भेजने की जिम्मेदारी तय की गई थी. प्राधिकरण के सीईओ की ओर से सभी जनप्रतिनिधियों के नंबर भी उपलब्ध कराए गए थे. बावजूद इसके कई नेताओं तक सूचना नहीं पहुंची.
