शादी करने पर भी नहीं मिली माफी, नाबालिग से रेप में पति को हुई 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश के हरदोई में नाबालिग से रेप के मामले में पीड़िता के पति को 10 साल की सजा सुनाई गई है. आरोपी ने घटना के बाद पीड़िता से शादी कर ली थी और उनके दो बच्चे भी हैं. बावजूद इसके, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग की सहमति मायने नहीं रखती और शादी करने से भी अपराध कम नहीं होता.

सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के हरदोई में नौ साल पहले एक नाबालिग से रेप के मामले में आरोपी को 10 साल की सजा हुई है. यह आरोपी खुद पीड़िता का पति है. रेप के बाद बवाल बढ़ने पर उसने पीड़िता से ही शादी कर ली थी. अब दोनों के दो बच्चे भी हैं. बावजूद इसके, कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी को सजा सुनाई गई. अपने फैसले में कोर्ट ने साफ किया कि पॉक्सो एक्ट में रेप पीड़िता की सहमति का भी कोई मायने नहीं होता. इस तरह के मामले में पीड़िता से शादी करने से भी आरोपी का अपराध कम नहीं होता. मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह की अदालत में हुई.

कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. प्रावधान किया है कि जुर्माना नहीं देने पर आरोपी को एक महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. जानकारी के मुताबिक यह मामला माधौगंज थाना क्षेत्र में एक गांव का है. यहां रहने वाली किशोरी ने अपने परिजनों के साथ थाने आकर एफआईआर दर्ज कराया था. इसमें बताया था कि 14 जनवरी 2017 की रात आरोपी ने उसके घर में घुसकर रेप किया. वहीं जब उसने शोर मचाया तो आरोपी मौके से फरार हो गया था.

समझौते में आरोपी ने की पीड़िता से शादी

पीड़िता की ओर से मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद आरोपी ने समझौते का प्रयास किया और इसी समझौते के तहत उसने पीड़िता से शादी कर ली. इसके बाद दोनों के दो बच्चे भी हुए. बाद में कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान औरापी और पीड़िता के बयान दर्ज हुए. चूंकि पीड़िता के साथ रेप की पुष्टि हुई है, इसलिए कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए उसे 10 साल के कैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग है तो सहमति से रेप भी दुष्कर्म ही माना जाएगा. इस तरह के मामलों में नाबालिग की सहमति कानून की नजर में शून्य होती है.

वारदात के वक्त 13 साल की थी पीड़िता

केस डायरी के मुताबिक वारदात के वक्त पीड़िता महज 13 साल चार महीने की थी. जांच में सामने आया कि आरोपी के साथ उसके प्रेम संबंध थे, लेकिन रंगे हाथ पकड़े जाने पर परिजनों के दबाव में पीड़िता ने एफआईआर दर्ज करा दी थी. इसी आधार पर आरोपी के पक्ष के वकील ने उसे निर्दोष बताया और रिहा करने की मांग की. हालांकि अदालत ने कहा कि वारदात के वक्त पीड़िता नाबालिग थी. ऐसे में उसकी सहमति के साथ संबंध बनाने पर कानून के मुताबिक दुष्कर्म का ही मामला बनेगा.

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