जांच अधिकारी का सवाल- जब सरकार ने खर्चे 88 करोड़, फिर कैसे प्राइवेट है जौहर यूनिवर्सिटी?
पीसीएस अधिकारी जेपी गुप्ता ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जब जमीन और ₹88 करोड़ से अधिक का खर्च सरकारी खजाने से हुआ है, तो यूनिवर्सिटी निजी कैसे? गुप्ता ने अवैध भूमि अधिग्रहण (शत्रु संपत्ति, वेटलैंड) का भी खुलासा किया और सुझाव दिया कि यूनिवर्सिटी का अधिग्रहण कर इसे एएमयू-बीएचयू की तर्ज पर राष्ट्र को समर्पित किया जाए. यह यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण के बजाय बेहतर विकल्प होगा.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी का मामला और गहराता जा रहा है. एक तरफ रामपुर विकास प्राधिकरण ने इस यूनिवर्सिटी में बनी 38 इमारतों को ढहाने की नोटिस दी है, वहीं दूसरी ओर आजम खान और इस यूनिवर्सिटी से संबंधित जांच के जांच अधिकारी रहे पीसीएस अफसर जेपी गुप्ता ने फेसबुक पर बड़ा दावा किया है. उन्होंने डीएम रामपुर और मंडलायुक्त मुरादाबाद को टैग करते हुए इस यूनिवर्सिटी को लेकर कई सवाल पूछे हैं.
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि जमीन सरकारी है, इसमें खर्च भी सरकारी खजाने से हुआ है, वो भी दो चार रुपये नहीं, बल्कि साढ़े 88 करोड, फिर फिर ये यूनिवर्सिटी प्राइवेट क्यों? उन्होंने अपनी पोस्ट में सुझाव दिया है कि इन परिस्थितियों में इस यूनिवर्सिटी को किसी व्यक्ति विशेष के कब्जे में छोड़ने से बढ़िया इसका अधिग्रहण कर एएमयू और बीएचयू की तर्ज पर इसे भी राष्ट्र को समर्पित कर देना चाहिए.
कौन हैं जेपी गुप्ता?
जेपी गुप्ता एक पीसीएस अधिकारी हैं. रामपुर में एडीएम रहते हुए इन्होंने आजम खान और जौहर विवि से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित विभिन्न कमेटियों की अध्यक्षता की थी. इनके ही जांच रिपोर्ट के बाद आजम खान के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और मामला राजस्व परिषद से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इनकी पुख्ता जांच और तथ्यात्मक रिपोर्ट की वजह से ही आजम खान की मुश्किलें आज तक खत्म नहीं हुईं.
सुझाव के रूप में लिखा पोस्ट
जेपी गुप्ता ने रामपुर विकास प्राधिकरण के ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर एक सुझाव के रूप में यह पोस्ट किया है. इसमें उन्होंने लिखा है कि जन भावनाओं के क्रम में यदि यूनिवर्सिटी को बचाए रखना है तो इसके लिए हमें दूसरी बातों पर विचार करना होगा. उन्होंने लिखा है कि इस यूनिवर्सिटी में उत्तर प्रदेश सरकार के 88 करोड़ से अधिक की रकम खर्च हुई है. इसके अलावा इस यूनिवर्सिटी में 1.13.842 हेक्टेयर भूमि शत्रु संपत्ति है, इसे वक़्फ़ घोषित कराकर कब्जे में लिया गया, जबकि ऐसा हो ही नहीं सकता. यह मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है.
ऐसे कब्जाई गई हैं जमीनें
उन्होंने लिखा है कि 11.8500 हेक्टेयर वेटलैंड में से भी 5 हेक्टेयर जमीन इस जौहर विश्वविद्यालय के कब्जे में है. यह सीधा-सीधा सुप्रीमकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है. इसी प्रकार 7.135 हेक्टेयर नवीन परती की जमीन भी गलत तरीके से लीज के रूप में हासिल की गई है. यही नहीं, इसमें 6 हेक्टेयर जमीन अनुसूचित जाति के लोगों की भी है, जिन्हें बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के खरीद लिया गया.
इस प्रकार खर्च हुआ सरकारी खजाना
जेपी गुप्ता ने इस यूनिवर्सिटी में खर्च हुए सरकारी खजाने का भी व्यौरा दिया है. उन्होंने बताया कि सी एन्ड डीएस के माध्यम से 2101.39 लाख रुपये इसमें खर्च हुए. इसके अलावा लोक निर्माण के माध्यम से 1373.32 लाख, जल निगम एक के माध्यम से 4686 लाख और जल निगम 2 के माध्यम 670.95 लाख रुपये इसमें खर्च हुए हैं. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि जब इतनी राशि सरकार ने खर्च किए तो यूनिवर्सिटी प्राइवेट क्यों.
आजम को भी दी सलाह
उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस यूनिवर्सिटी को तत्काल अपने कब्जे में ले ले, लेकिन सरकार के ऐसा कदम उठाने से पहले आजम खान को चाहिए कि वह खुद आगे बढ़कर ये कह दें कि ‘मैंने हिंदुस्तान कि दूसरी आबादी को कलम देने के लिए जो यूनिवर्सिटी बनाई थी, अब पूरे हिंदुस्तान को अपनी आबादी मानते हुए इसे राष्ट्र को समर्पित करता हूं.’ यह उसी प्रकार होगा, जैसे पहले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, आनंद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया गया था.
