जेवलिन खरीदने तक के पैसे नहीं थे.. बांस से अभ्यास कर जौनपुर के रोहित ने नीरज चोपड़ा को पछाड़ा
जौनपुर के रोहित यादव ने 65वीं नेशनल इंटर स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर भाला फेंककर इतिहास रचा. गरीबी के बावजूद बांस के डंडे से अभ्यास कर उन्होंने विश्व में दूसरा और भारत में पहला स्थान हासिल किया. 25 वर्षीय रोहित की इस असाधारण उपलब्धि के पीछे प्रेरणादायक संघर्ष की कहानी भी है.
जौनपुर के रहने वाले युवा एथलीट रोहित यादव ने भाला फेंक प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रोहित ने 87.05 मीटर का थ्रो कर बड़ी उपलब्धि हासिल की. वह भारत के शीर्ष भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं.
दरअसल, जौनपुर के अदारी डाभिया गांव के रहने वाले रोहित यादव ने 12 वर्ष की उम्र से ही भाला फेंकने का अभ्यास शुरू किया था. संसाधनों की कमी और गरीबी के चलते रोहित ने हार नहीं मानी. उन्होंने बांस के डंडे से अभ्यास करके नीरज चोपड़ा को पछाड़ते हुए भारत में पहला स्थान और दुनियां के दूसरे भाला फेंक खिलाड़ी का मुकाम हासिल किया है.
आर्थिक तंगी के बावजूद सपनों को टूटने नहीं दिया
रोहित यादव की सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया. बेटे की इस उपलब्धि से उनके माता-पिता बेहद ही खुश हैं. पिता सभाजीत यादव ने बताया कि उनकी पहले आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. उसके बावजूद वह अपने तीनों बेटों को भाला फेंक का अभ्यास कराते थे.
रोहित के पिता सभाजीत यादव एक किसान हैं. उनके तीनों बेटों का नाम राहुल (28), रोहित (25) और रोहन (19) है. रोहित के बड़े भाई राहुल यादव ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शुरुआती दिनों में संसाधनों की भारी कमी थी, लेकिन मेहनत और लगन के दम पर आज रोहित ने भाला फेंक में यह बड़ा मुकाम हासिल किया है.
बांस के डंडे से अभ्यास करके हासिल किया मुकाम
रोहित के भाई राहुल यादव ने बताया कि 13 -14 वर्ष की उम्र से वह लोग भाला फेंकने का अभ्यास शुरू किए थे. पिता जी किसान हैं परिवार की आर्थिक स्थितियां ठीक नहीं थी इसलिए जेवलिन खरीदने के पैसे तक नहीं थे. तब उन लोगों ने बांस के डंडे को जेवलिन बनाकर उससे अभ्यास करना शुरू किया. बाद में स्थितियां ठीक होती गई.
राहुल ने बताया कि रोहित भाला फेंक प्रतियोगिता में कमलवेंथ गेम के छठवां स्थान, वर्ल्ड चैंपियनशिप में दसवां स्थान मिला था. भुनेश्वर मे भी रोहित को अन्तर्राज्यीय चैंपियनशिप में तीसरा स्थान मिला है. उन्होंने एशियन गेम्स के लिए भी क्वालीफाई किया है. 25 वर्ष की उम्र में रोहित यादव देश के नंबर एक और विश्व के नम्बर दो भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं.
तीनों भाई भाला फेंक खिलाड़ी, जीत चुके हैं मेडल
रोहित के बड़े भाई राहुल यादव ने टीवी9 डिजिटल को बताया कि वह तीनों भाई भाला फेंक प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन कर चुके हैं. राहुल गांव के बच्चों को भाला फेंकने का प्रशिक्षण भी देते हैं. दूसरे भाई रोहित यादव ने भुवनेश्वर में जीत दर्ज की है. उनके सबसे छोटे भाई रोहन भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाला फेंक प्रतियोगिता में मेडल जीत चुके हैं.