कानपुर लैंबॉर्गिनी केस: कार छुड़ाने के लगेंगे 8.3 करोड़ रुपये, दो अदालतों से मना के बाद CJM कोर्ट का फैसला
कानपुर लैंबॉर्गिनी कार मामले में गाड़ी को छुड़ाने के 8.3 करोड़ रुपये लगेंगे. सीजेएम कोर्ट ने पर्सनल बॉन्ड पर लैंबॉर्गिनी कार रिलीज करने का आदेश दिया है. इससे पहले दो अदालतों ने सुनवाई से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कार बेचने या ट्रांसफर करने पर भी पाबंदी लगाई है.
कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी कार मामले में आखिरकार कोर्ट ने गाड़ी को रिलीज़ करने का आदेश दे दिया है. इसके बावजूद जैसे इस पूरे मामले में अभी तक नाटकीय घटनाक्रम हुए है वैसा ही कुछ गाड़ी की रिलीज़ के दौरान भी देखने को मिला. आखिरकार दो अदालतों के मना करने के बाद सीजेएम सूरज मिश्रा की कोर्ट ने गाड़ी को रिलीज़ करने का आदेश दिया.
कानपुर के वीआईपी रोड पर दो हफ्ते पहले लैंबॉर्गिनी कार से एक्सीडेंट हुआ. कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के पुत्र शिवम मिश्रा चला रहे थे. एक्सीडेंट में एक बाइक सवार मामूली रूप से घायल हुआ था. पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया था. जमानती धाराएं होने की वजह से कोर्ट ने ना सिर्फ शिवम को रिहा कर दिया बल्कि पुलिस को फटकार भी लगाई थी.
आठ करोड़ तीस लाख रुपए जमा करने होंगे
शुक्रवार को बचाव पक्ष की तरफ से कोर्ट में लैंबॉर्गिनी को रिलीज़ करने की सुनवाई होनी थी. अप्रत्याशित रूप से एसीजेएम 7 की कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने से मना कर दिया. इसके बाद इस मामले को अपर सिसिल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में भेजा गया लेकिन उस कोर्ट ने भी सुनवाई करने से इंकार कर दिया.
इसके बाद प्रशासनिक आदेश के तहत इस मामले को सीजेएम सूरज मिश्रा की कोर्ट में भेजा गया. कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि लैंबॉर्गिनी कार को रिलीज़ कर दिया जाए. साथ ही शर्त रखी कि कार को रिलीज़ तभी किया जाए जब पर्सनल बॉन्ड के तौर पर आठ करोड़ तीस लाख रुपए जमा कर दिए जाएं.
कार को न बेच सकता है, ना ही होगा ट्रांसफर
इसके अलावा कोर्ट ने अन्य शर्तें भी रखी है जिसके अनुसार, रिलीज़ होने के बाद कार मालिक ना तो कार को बेच सकता है और ना ही ट्रांसफर कर सकता है. इसके अलावा कार का रंग रूप आदि किसी भी हालत में तब्दील नहीं किया जाएगा. साथ ही किसी शर्त के उल्लघन की दशा में आवेदक की तरफ से राज्य सरकार के पक्ष में पर्सनल बॉन्ड की राशि जमा करेगा.
