​जब ‘हेडमास्टर’ खुद बन गए स्टूडेंट, कानपुर DM ने कुछ इस अंदाज में समझीं जनगणना की बारीकियां

कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनगणना 2027 के प्रशिक्षण में शिविर में कहा कि जनगणना केवल कागज पर आंकड़े जुटाने की एक कवायद नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के भविष्य की नींव है. यही आंकड़े आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक और सामाजिक नीतियों की दिशा तय करेंगे.

जनगणना प्रशिक्षण सत्र के दौरान DM जितेंद्र प्रताप सिंह Image Credit:

कानपुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) में शनिवार को जनगणना 2027 का प्रशिक्षण सत्र आयोजित की गई. इस दौरान एक अनूठा दृश्य देखने को मिला. अमूमन निरीक्षण के दौरान कड़े निर्देश देने वाले जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह यहां एक ‘जिज्ञासु छात्र’ की भूमिका में नजर आए. उन्होंने गणना कार्मिकों के साथ बैठकर पूरे सत्र को बेहद ध्यानपूर्वक सुना.

​प्रशिक्षण सत्र में फील्ड ट्रेनर आलोक यादव द्वारा जनगणना के तकनीकी पहलुओं और डेटा संकलन की प्रक्रिया समझाई जा रही थी. जिलाधिकारी ने इसकी बारीकियां समझीं और बीच-बीच में कार्मिकों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया. डीएम का यह सहज अंदाज देख वहां मौजूद कार्मिक भी प्रभावित हुए और पूरे उत्साह के साथ अपनी शंकाओं का हल किया.

कानपुर में 10,467 गणना कार्मिक ले रहे प्रशिक्षण

डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि जनगणना के कार्य में त्रुटि की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने त्रुटिहीन डेटा संकलन के महत्व पर जोर दिया. डीएम ने बताया कि जनगणना केवल कागज पर आंकड़े जुटाने की एक कवायद नहीं है, यह राष्ट्र की नीतियों का आधार बनेंगे, इसलिए हर प्रविष्टि अत्यंत सावधानी और जिम्मेदारी से दर्ज की जानी चाहिए.

​कानपुर नगर में जनगणना 2027 की तैयारियां युद्धस्तर पर संचालित हो रही हैं. प्रशासन द्वारा जिले के 15 प्रशिक्षण स्थलों पर 172 फील्ड ट्रेनर्स की तैनाती की गई है. इनके माध्यम से कुल 10,467 जनगणना कार्मिकों को गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है. केआईटी केंद्र, जहां डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह स्वयं पहुंचे थे, वहां 250 गणना कार्मिक प्रशिक्षण ले रहे हैं.

​जनगणना-2027 की समयसीमा दो चरणों में विभाजित

​जनगणना-2027 की समयसीमा दो चरणों में विभाजित किया गया है. ​प्रथम चरण (7 मई से 21 मई) में आम नागरिकों के लिए ‘स्व-गणना’ की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिससे लोग स्वयं अपना विवरण पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे. जबकि ​द्वितीय चरण (22 मई से 20 जून) में प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार करेंगे और जनसंख्या का विस्तृत विवरण संकलित करेंगे.

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