अब कानपुर में ही होगा किडनी ट्रांसप्लांट, GSVM पीजीआई को मिला 5 साल का लाइसेंस

कानपुर के जीएसवीएसएस पीजीआई को किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करने की मंजूरी मिल गई है. यह लखनऊ के बाद प्रदेश का दूसरा सरकारी किडनी प्रत्यारोपण केंद्र होगा. इससे कानपुर और आसपास के जिलों के हजारों किडनी मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी. अगले सप्ताह से ओपीडी शुरू कर दिए जाएंगे.

कानपुर PGI में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट को मंजूरी

कानपुर और आसपास के जिलों के किडनी मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब इलाज के लिए उन्हें लखनऊ या दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा. गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट (GSVSS PGI) में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करने की मंजूरी मिल गई है. शासन ने पांच साल का लाइसेंस जारी किया है.

अभी तक यह सुविधा केवल लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में उपलब्ध थी. कानपुर प्रदेश का दूसरा सरकारी किडनी ट्रांसप्लांट केंद्र बनने जा रहा है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अगले सप्ताह से किडनी ट्रांसप्लांट ओपीडी शुरू कर दी जाएगी. यहां प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों का पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में जोड़ा जाएगा.

नर्सिंग स्टाफ SGPGI में ले रहे विशेष प्रशिक्षण

अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, डायलिसिस यूनिट, डोनर रूम, आईसीयू और छह बेड की विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट पहले से तैयार है. इसके अलावा, अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण से सुरक्षा के लिए आइसोलेशन कॉरिडोर सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं.

इससे पहले जनवरी में केजीएमयू, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और एसजीपीजीआई के विशेषज्ञों की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया था. इसके बाद अब शासन ने लाइसेंस जारी कर दिया है. फिलहाल, कानपुर पीजीआई के यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग का नर्सिंग स्टाफ एसजीपीजीआई, लखनऊ में विशेष प्रशिक्षण भी ले रहा है.

‘यह संस्थान की चिकित्सा और शैक्षणिक उपलब्धि’

ट्रांसप्लांट यूनिट के नोडल अधिकारी प्रो. मनीष सिंह ने बताया कि अंगदान दिवस के अवसर पर यह अनुमति मिलना संस्थान के लिए गर्व की बात है. उनका कहना है कि देशभर में किडनी प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कानपुर में यह सुविधा शुरू होने से हजारों मरीजों को राहत मिलेगी और समय पर इलाज संभव हो सकेगा.

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने इसे संस्थान की चिकित्सा और शैक्षणिक उपलब्धि बताया. वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. युवराज गुलाटी के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में हर महीने 20 से 25 ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिन्हें किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है. अब उन्हें इलाज के लिए दूसरे शहरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा.

Follow Us