एक स्प्रे और फैटी लीवर की समस्या का अंत… IIT कानपुर ने खोज निकाला इलाज
IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने फैटी लीवर की समस्या के लिए क्रांतिकारी इलाज खोज निकाला है. रिसर्च टीम ने एक प्राकृतिक स्प्रे तैयार किया है, जिसमें हर्बल कंपाउंड्स और नैनो-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. यह स्प्रे लीवर में जमा फैट को तेजी से कम करता है, इंसुलिन रेसिस्टेंस सुधारता है और सूजन को घटाता है. IIT ने इसे 'लीवर-स्प्रे' नाम दिया है.
हमारे देश में फैटी लीवर एक ऐसी समस्या है, जिससे हर तीसरा व्यक्ति ग्रसित हो रहा है. शराब का सेवन हो या फिर तेलयुक्त खाना या फास्ट फूड… सभी लिवर को फैटी कर रहे है और उसका सबसे बड़ा असर व्यक्ति के पूरे स्वास्थ के ऊपर पड़ता है. उससे ज्यादा बड़ी बात यह है कि फैटी लीवर का कोई इलाज भी मौजूद नहीं है. ऐसे में आईआईटी कानपुर ने ऐसा आविष्कार कर लिया है, जिससे फैटी लीवर का इलाज संभव हो पाएगा.
आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग ने एक ऐसे स्प्रे का आविष्कार किया है, जिसकी मदद से फैटी लीवर की समस्या को समाप्त किया जा सकता है. फास्ट फूड, तेलयुक्त खाना और शराब के सेवन से फैटी लीवर की समस्या हमारे देश में हर तीसरे व्यक्ति को हो रही है. इसके अलावा आंत की बीमारियों भी होने लगी है. अभी इसकी कीमत बताना मुश्किल है, लेकिन आम मरीज भी इसको खरीद पाएगा क्योंकि यह नेचुरल पॉलिमर से बना है, जिसका उत्पादन हमारे देश में होता है.
कैसे काम करता है यह स्प्रे
प्रो. अशोक कुमार के अनुसार, ‘आज तक फैटी लीवर को ठीक करने की दवा मौजूद नहीं है… इसी को देखते हुए उन्होंने और उनकी टीम ने एक ऐसे स्प्रे का आविष्कार किया है जिसकी मदद से अब फैटी लीवर की समस्या को खत्म किया जा सकता है. यह स्प्रे बाहर रहने पर पानी की तरह होता है लेकिन जैसे ही इसको शरीर के अंदर लिवर में भेजा जाएगा तो यह जैल बन जाएगा और दो हफ्तों के अंदर फैटी लीवर की समस्या खत्म हो जाएगी.’
लीवर के खराब सेल को सही कर देता है
जो हेल्थी सेल होते हैं, जिनको एग्जोज़ोम कहते है, उनको पॉलिमर सोल्यूशन में डालकर लेप्रोस्कोपिक विधि से स्प्रे करते हैं, जिसके बाद यह स्प्रे जैल में बदल जाता है और खराब सेल को सही कर देता है. एक हफ्ते में असर दिखना शुरू हो जाता है और दो से तीन महीने में फैटी लीवर पूरी तरह सही हो जाता है. यह लीवर के अलावा दूसरे अंगों को भी सही कर सकता है. ICMR ने मरीजों पर क्लीनिकल टेस्ट करने की अनुमति दे दी है और एक से दो साल में यह ट्रायल पूरा हो जाएगा.