वाह रे सिस्टम… 60 साल बाद भी जमीन पर नहीं मिला कब्जा, दुखी होकर सगे भाई करने लगे आत्मदाह; मचा हड़कंप
कानपुर में 60 साल पुराने जमीन विवाद से परेशान दो सगे भाइयों ने कलक्ट्रेट में आत्मदाह का प्रयास किया. आवास विकास द्वारा अधिगृहीत भूमि वापस न मिलने से हताश होकर उन्होंने यह कदम उठाया. पुलिस कांस्टेबल की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टला. जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल समाधान का आश्वासन दिया है.
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सरकारी सिस्टम के शिकार दो सगे भाइयों ने कलक्ट्रेट के बाहर सोमवार की सुबह आत्मदाह का प्रयास किया. दोनों ने अपने ऊपर डीजल छिड़क लिया और आग लगाने की कोशिश की गनीमत रही कि वहां मौजूद एक पुलिस कांस्टेबल की नजर पड़ गई और उसने दोनों के हाथों से डीजल का बोतल छीन लिया. इस घटना के बाद कलक्ट्रेट में हड़कंप मच गया. खबर डीएम तक पहुंची तो उन्होंने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए समाधान का भरोसा दिया है.
जानकारी के मुताबिक कानपुर में मैथा निवासी पदम सिंह और मोती सिंह नौबस्ता के आवास विकास में रहते हैं. उनकी वहां पर जमीन भी है. इन दोनों भाइयों का आरोप है कि उनकी जमीन 60 साल पहले आवास विकास ने एक्वायर किया था. बाद में उपयोगिता नहीं होने पर उनकी जमीन लौटाने के आदेश हुए, लेकिन इन 60 सालों में आवास विकास ने उनकी जमीन नहीं लौटाई है. वो लोग इस संबंध में शिकायत लेकर डीएम से सीएम तक और चौकी से थाने तक कर चुके हैं.
इसलिए लिया आत्मदाह का फैसला
दोनों भाइयों ने बताया कि उनकी शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. वहीं दौड़भाग कर थक जाने के बाद उन लोगों ने डीएम ऑफिस के बाहर आत्मदाह का फैसला लिया है. इधर, घटना के बाद कलक्ट्रेट में हड़कंप मच गया. सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने दफ्तरों से निकलकर बाहर आ गया. इतने में मामले की जानकारी डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को हुई तो उन्होंने तुरंत एडीएम एफआर विवेक चतुर्वेदी को मौके पर भेजा और उनकी समस्या का समाधान कराने को कहा.
सामने आई आवास विकास की लापरवाही
एडीएम की पूछताछ में दोनों भाइयों ने अपना पूरा दर्द बताया. इसके बाद डीएम के आदेश पर आवास विकास के अधिकारियों को बुलाया गया. इन्होंने बताया कि इतने सालों में मौके पर आबादी हो गई है. इसकी वजह से पीड़ित की भूमि चिन्हित करने में परेशानी हो रही है. इसके बाद डीएम डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने पीड़ितों को जल्द समाधान का भरोसा दिया है. उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार कभी उनसे नहीं मिला. अब मामला संज्ञान में आया है, जल्द ही पीड़ितों की जमीन उन्हें लौटा दी जाएगी.
