डिप्रेशन और एक्जाम प्रेशर… कानपुर IIT में क्यों हो रहे सुसाइड? हैरान कर देंगे कारण, 25 महीने में 9 छात्रों की मौत
आईआईटी कानपुर में 25 माह में 9 छात्र सुसाइड गंभीर चिंता का विषय है. पुलिस व आईआईटी संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक पढ़ाई का दबाव और अवसाद इन मौतों की प्रमुख वजह है. मानवाधिकार आयोग मामले की जांच कर रहा है.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर जैसे देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के सुसाइड की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. बीते 25 महीनों में ही कानपुर आईआईटी में नौ छात्र-छात्राओं ने अपनी जान दे दी है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक और दुखद है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल भी खड़े करता है. पुलिस और आईआईटी प्रशासन की ओर से राज्य मानवाधिकार आयोग में दाखिल रिपोर्ट में इन घटनाओं का हैरतंगेज खुलासा हुआ है.
इन रिपोर्ट में पढ़ाई का अत्यधिक दबाव और इसके परिणामस्वरुप अवसाद को सुसाइड का प्रमुख कारण बताया गया है. आयोग में इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अब 11 मार्च की तिथि मुकर्रर की है. यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण फाइटर ने जनवरी में राज्य मानवाधिकार आयोग में एक याचिका दायर की. याचिका में उन्होंने आईआईटी कानपुर में हो रही इन आत्महत्याओं के पीछे छिपे कारणों की गहन जांच की मांग की.
आयोग ने मांगी थी रिपोर्ट
उनका कहना था कि, “यह समझना जरूरी है कि इतने प्रतिभाशाली छात्र, जो देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान में प्रवेश पाते हैं, आखिर किस दबाव में अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं. क्या संस्थान की व्यवस्था में कोई कमी है या छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया जा रहा?” आयोग ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए आईआईटी के निदेशक और कानपुर के पुलिस आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. पुलिस की ओर से दाखिल रिपोर्ट में इस समस्या की गहराई को स्पष्ट किया गया है.
आईआईटी ने दी ये जानकारी
पुलिस के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, सहायक पुलिस आयुक्त कल्याणपुर की जांच से पता चला कि अधिकांश मामलों में पढ़ाई का बोझ और अवसाद (डिप्रेशन) मुख्य वजह रहा है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि आईआईटी में इन घटनाओं की जांच के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने एक समिति गठित की है, जबकि संस्थान स्तर पर भी एक जांच कमेटी काम कर रही है. हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का जिक्र नहीं है कि मेधावी छात्रों पर पढ़ाई का दबाव किस प्रकार का है, जो उन्हें इतना प्रभावित करता है.
जागरुकता अभियान शुरू
दूसरी ओर, आईआईटी प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में इन घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों का विस्तार से वर्णन किया है. आईआईटी के रजिस्ट्रार विश्वरंजन द्वारा शिक्षा मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में कहा है कि हालिया मामले, जैसे रामस्वरूप ईशराम की आत्महत्या, की जांच के लिए संस्थान ने एक विशेष समिति बनाई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र कल्याण अधिष्ठाता का कार्यालय मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को मिटाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चला रहा है. संस्थान में परामर्श सत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही गेटकीपर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जो संकट में फंसे छात्रों की पहचान और सहायता के लिए हैं.