16 साल से नहीं मान रहे कोर्ट के आदेश, अब कानपुर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पर दर्ज होगा मुकदमा

कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) के उपाध्यक्ष पर अदालत के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप है. अब कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है. उन्होंने 26 साल पुराने एक आपराधिक मामले के मूल दस्तावेज़ कोर्ट में वापस जमा नहीं किया, जब लगातार उन्हें समय दिया गया.

केडीए उपाध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज Image Credit:

कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) के उपाध्यक्ष पर जानबूझकर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप है. कोर्र रही है. कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है. साथ ही 20 हजार रुपये के जमानतीय अधिपत्र जारी करने को कहा है. यह फैसला करीब 26 साल पुराने एक आपराधिक प्रकरण में आया है.

यह आपराधिक मामला 1999 में तत्कालीन अनुसचिव, जोन-3 केडीए अनुपम शुक्ला की तहरीर पर दर्ज किया गया था. लेकिन मूल अभिलेख न्यायालय में अब तक वापस दाखिल नहीं किए गए. अदालत ने पाया कि न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद 16 वर्षों से मूल अभिलेख वापस दाखिल नहीं किए गए, जिससे मामले के विचारण में लगातार बाधा उत्पन्न हो रही है.

मूल अभिलेख वापस दाखिल नहीं किए गए

मामले में पूर्व में साक्षी एवं आवेदक राज नारायण तिवारी की मुख्य परीक्षा 30 अगस्त 2008 को दर्ज की गई थी. 3 फरवरी 2010 को केडीए की ओर से अधिवक्ता बलदेव राज सहदेव ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया था कि हाईकोर्ट में लंबित याचिका में जवाब दाखिल करने के लिए प्रकरण से संबंधित विभागीय मूल दस्तावेजों की आवश्यकता है.

इस पर कोर्ट ने शर्त के साथ मूल अभिलेख केडीए को उपलब्ध कराने का आदेश दिया था, कहा था कि हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने के बाद सभी मूल दस्तावेज वापस जमा किए जाएंगे. उस समय केडीए द्वारा इस आशय का वचन पत्र भी प्रस्तुत किया गया था. लेकिन लगभग 16 साल बाद भी केडीए द्वारा मूल अभिलेख न्यायालय में वापस दाखिल नहीं किए गए.

कारण बताओ नोटिस भी हो चुका है जारी

सीजेएम सूरज मिश्रा की न्यायालय ने 20 नवंबर 2025 को विस्तृत आदेश पारित कर केडीए के प्रमुख अधिकारी/उपाध्यक्ष को अगले दिन हर हाल में मूल अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद केडीए की ओर से 19 दिसंबर 2025 को एक प्रार्थना पत्र देकर अभिलेखों को खोजने और दाखिल करने के लिए एक माह का समय मांगा गया था.

इसपर कोर्ट ने उन्हें 9 जनवरी 2026 तक का समय दिया. इसके बाद भी 19 जनवरी, 2 फरवरी और 9 फरवरी 2026 की तिथियां तय की गईं, लेकिन उपाध्यक्ष केडीए द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम सूरज मिश्रा की न्यायालय ने 9 फरवरी 2026 को केडीए उपाध्यक्ष के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

‘आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की जा रही’

नोटिस की प्राप्ति 17 फरवरी 2026 को उनके कार्यालय में दर्ज भी हो चुकी है. इसके बावजूद न तो मूल अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत किए गए और न ही कारण बताओ नोटिस का कोई उत्तर दिया गया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि केडीए उपाध्यक्ष की ओर से आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की जा रही है.

इसी आधार पर सीजेएम सूरज मिश्रा की कोर्ट ने उपाध्यक्ष केडीए के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 349 के तहत पृथक आपराधिक प्रकीर्ण वाद दर्ज करने और 20 हजार रुपये के जमानतीय अधिपत्र जारी करने का आदेश दिया है. साथ ही कार्यालय को आदेश के अनुपालन के निर्देश देते हुए मामले को 1 अप्रैल 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.

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