मारपीट से हड़ताल तक… वकीलों की सुरक्षा पर कानपुर में होगा महामंथन, जुटेंगे पूरे यूपी के अधिवक्ता
अधिवक्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए कानपुर के वकीलों ने आंदोलन का बीड़ा उठाया है. सितंबर में कानपुर में प्रांतीय सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें प्रदेशभर के वकील जुटेंगे. इस दौरान वकीलों की सुरक्षा, पेशागत अधिकार और न्यायिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
अधिवक्ताओं की सुरक्षा, उनके पेशागत अधिकार और न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर कानपुर में सितंबर में प्रदेशभर के वकीलों की बड़ी बैठक होने जा रही है. कानपुर बार एसोसिएशन और दि लायर्स एसोसिएशन की संयुक्त आमसभा में लिए गए फैसले के बाद 10 और 11 सितंबर 2026 को कानपुर बार एसोसिएशन परिसर में प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा.
शुक्रवार को दोनों संगठनों की संयुक्त प्रेसवार्ता में पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है. उनका कहना है कि कई बार वकीलों के साथ मारपीट और दूसरे विवाद सामने आते हैं, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में उनकी सुरक्षा के लिए कोई मजबूत और प्रभावी व्यवस्था अब तक नहीं बन सकी है.
हड़ताल पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लेकर चिंता
प्रेसवार्ता में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जुड़े कुछ प्रस्तावित संशोधनों को लेकर भी आपत्ति जताई गई. पदाधिकारियों के मुताबिक, इन प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए. इसमें दोनों बार संगठनों की ओर से अपने सुझाव और आपत्तियां संबंधित स्तर पर भेजी जा चुकी हैं. साथ ही न्यायिक कार्य से विरत रहने पर लागू व्यवस्था पर भी चिंता जताई.
पदाधिकारियों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मामले में अधिवक्ताओं के हित या उनकी सुरक्षा को लेकर बार संघ न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला करता है, तो उसे हड़ताल माना जा सकता है. ऐसी स्थिति में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की निर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है.
कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री विनय मिश्रा ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से अधिवक्ताओं की सामूहिक आवाज कमजोर पड़ सकती है. उनका कहना था कि वकील केवल अदालत में पैरवी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं और न्याय की मांग को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है.
सात साल तक की सजा वाले मामलों पर भी चिंता
लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजीव यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका संख्या 12231/2025 में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सात साल तक की सजा वाले मामलों में अधिवक्ताओं से जुड़े मुकदमों को दूसरे जनपदों में स्थानांतरित किए जाने की व्यवस्था का व्यापक असर पड़ सकता है.
दोनों संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में अधिवक्ताओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इन्हीं मुद्दों पर प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की राय लेने के लिए कानपुर में सम्मेलन बुलाया गया है. सम्मेलन से मिले सुझावों और प्रस्तावों को न्यायपालिका तथा सरकार के सामने रखा जाएगा.