मानसिक भ्रम या साजिश? CSJMU छात्रा का गैंगरेप आरोप यूनिवर्सिटी जांच में निकला झूठा
कानपुर यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने अपने साथ पढ़ने वाले तीन छात्रों पर गैंग रेप की कोशिश और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. इस मामले की जांच के लिए कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. अब सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट किया कि बीएमएलटी पाठ्यक्रम की छात्रा द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाए गए हैं.
कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज में पिछले दिनों सामने आए सामूहिक दुष्कर्म की कोशिश और छेड़छाड़ के सनसनीखेज मामले में नया मोड़ आ गया है. यूनिवर्सिटी द्वारा गठित विशेष जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें आरोपित छात्रों पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है. समिति की सिफारिश के आधार पर कुलसचिव ने तीनों छात्रों का निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लेने के निर्देश जारी किए हैं.
छात्रा ने क्या आरोप लगाए थे?
कानपुर यूनिवर्सिटी की छात्रा ने अपने साथ पढ़ने वाले तीन छात्रों पर गैंग रेप की कोशिश और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. छात्रा के पिता ने आरोप लगाया था कि 16 मार्च को विश्वविद्यालय परिसर के एक खाली कमरे में तीन छात्रों ने उनकी बेटी को भोजन के बहाने बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास व छेड़छाड़ की. पिता का दावा था कि इस घटना के बाद छात्रा गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में चली गई थी. मामला प्रकाश में आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित छात्रों को निलंबित कर दिया था और पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की थी.
कुलपति ने उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था
31 मार्च को सामने आए इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था. अब सौंपी गई रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट किया कि बीएमएलटी पाठ्यक्रम की छात्रा द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाए गए. जांच के दौरान समिति ने पाया कि यह घटनाक्रम किसी आपराधिक साजिश या दुर्भावना का परिणाम नहीं था. रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के कारण यह भ्रम और आरोप उत्पन्न हुए. समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि आरोपित छात्रों के विरुद्ध कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिसके बाद उनका निलंबन रद्द करना न्यायोचित है.
छात्रों का निलंबन वापस लेने का निर्देश
विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने जांच समिति की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज को निर्देशित किया है कि आरोपित छात्रों का शैक्षणिक निलंबन वापस लिया जाए. इसके साथ ही, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रा के भविष्य और स्वास्थ्य के प्रति भी चिंता व्यक्त की है. समिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रा का उचित चिकित्सीय उपचार अपनी देखरेख में कराने का सुझाव दिया है, ताकि उसे मानसिक अवसाद से बाहर निकाला जा सके.
