शस्त्र लाइसेंस चाहिए तो पहले छोड़ना होगा पान मसाला! कानपुर DM ने रख दी अनोखी शर्त
कानपुर के डीएम ने जनता दर्शन में शस्त्र लाइसेंस के एक आवेदक को पान मसाला छोड़ने की शर्त रखी. इतना ही नहीं, डीएम ने पान मसाला छोड़ने का प्रमाण देने के लिए परिवार के सदस्यों और ग्राम प्रधान से शपथपत्र लाने को भी कहा. साथ ही मजाकिया अंदाज में कहा, 'तुम्हारी पीक ही तुम्हारा हथियार है.'
कभी कानपुर को देश के औद्योगिक मानचित्र पर ‘मैनचेस्टर ऑफ द ईस्ट’ के नाम से जाना जाता था. शहर की पहचान यहां की कपड़ा मिलों और औद्योगिक गतिविधियों से थी. समय के साथ मिलों की रौनक भले ही कम हुई, लेकिन कानपुर की एक नई पहचान पान मसाले से जुड़ गई. इसी पहचान पर मंगलवार को जनता दर्शन में जिलाधिकारी ने एक आवेदक से कुछ ऐसा कहा कि वहां मौजूद लोग भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके.
नर्वल निवासी अंकुर सिंह विरासत के आधार पर शस्त्र लाइसेंस अपने नाम कराने की मांग लेकर जिलाधिकारी के जनता दर्शन में पहुंचे थे. अंकुर ने बताया कि परिवार में पूर्व से पिता के नाम शस्त्र लाइसेंस था और वह उसे विरासत के आधार पर अपने नाम कराना चाहते हैं. लेकिन इसी दौरान जिलाधिकारी की नजर अंकुर के पान मसाला खाने पर पड़ी.
‘तुम्हारी पीक ही तुम्हारा हथियार है’
इसके बाद जिलाधिकारी ने बातचीत के क्रम में मजाकिया अंदाज में कहा कि “तुम्हारी पीक ही तुम्हारा हथियार है, पहले पान मसाला खाना छोड़ो.’ डीएम की इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई. हालांकि, इसके बाद उन्होंने शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को लेकर जरूरी दस्तावेज और सत्यापन के बारे में भी जानकारी दी.
डीएम ने अंकुर से कहा कि विरासत के आधार पर लाइसेंस संबंधी दावे की पुष्टि के लिए परिवार के सदस्यों और स्थानीय स्तर पर सत्यापन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं. साथ ही निर्देश दिया कि वह माता-पिता, बाबा और ग्राम प्रधान से भी शपथपत्र लेकर आए कि अब उसने पान मसाला छोड़ दिया है और आगे कभी पान मसाला नहीं खाएगा.
स्वास्थ्य को लेकर डीएम ने दी नसीहत
जनता दर्शन में हुई यह बातचीत प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ पान मसाले को लेकर जिलाधिकारी की चुटीली टिप्पणी के कारण भी चर्चा में रही. वहीं, डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पान मसाला आवेदकों को यह कहने का मकसद सिर्फ इतना है कि वो इस बुरी आदत को छोड़ दें जिससे उनकी सेहत और पैसे दोनों की बचत हो.
अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस किसी को केवल पारिवारिक विरासत के आधार पर स्वतः नहीं मिल जाता, बल्कि निर्धारित नियमों और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आवेदन पर नियमानुसार फैसला लिया जाएगा. फिलहाल, यह बातचीत अब चर्चा का विषय बनी हुई है.