UP की इस यूनिवर्सिटी में में पढ़ाया जाएगा सिख गुरुओं का इतिहास, 2 साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू
कानपुर के CSJMU में सिख गुरुओं के इतिहास पर दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है. यह पाठ्यक्रम सिख धर्म के उद्भव, गुरुओं के जीवन, शिक्षाओं और समाज में उनके योगदान को गहराई से समझने में सहायक होगा. मात्र 2,000 रुपये शुल्क वाला यह कोर्स शहादत की गौरवशाली परंपरा और मानवीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाएगा.
कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में सिख गुरुओं का इतिहास पढ़ाया जाएगा. इसमें सिख गुरुओं की शहादत विषय पर दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया गया है. इस कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. विश्वविद्यालय का यह नया कोर्स उन विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जो सिख धर्म के इतिहास, गुरुओं के जीवन, उनकी शिक्षा और समाज को दिए गए योगदान को गहराई से समझना चाहते हैं.
चार सेमेस्टर में संचालित होने वाले इस डिप्लोमा की कुल फीस मात्र 2,000 रुपये रखी गई है. यूनिवर्सिटी की कोशिश है कि अधिक से अधिक छात्र इस पाठ्यक्रम का लाभ उठा सकें. कम शुल्क के कारण यह कोर्स आम विद्यार्थियों के लिए भी आसानी से सुलभ रहेगा. श्री गुरु सिंह सभा, कानपुर महानगर के चेयरमैन कुलदीप सिंह ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल इतिहास पढ़ाना नहीं है, बल्कि सिख धर्म के उन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है, जिन्होंने समाज को एक नई दिशा दी.
पाठ्यक्रम में क्या हैं विष्य
कुलदीप सिंह ने कहा कि कोर्स में सिख धर्म के उद्भव और विकास से लेकर दसों सिख गुरुओं के जीवन, उनके विचारों और समाज सुधार में उनकी भूमिका का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा. इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब में निहित मानवीय मूल्यों, धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक न्याय, समानता, भाईचारे और सेवा की भावना जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा सिख इतिहास में शहादत की गौरवशाली परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदानों पर भी विस्तार से अध्ययन कराया जाएगा.
सांस्कृतिक जागरुकता की पहल
विश्वविद्यालय और श्री गुरु सिंह सभा का मानना है कि आज के समय में ऐसे पाठ्यक्रम युवाओं को भारतीय इतिहास और संस्कृति के उन महत्वपूर्ण अध्यायों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं, जिनसे उन्हें प्रेरणा और नैतिक मूल्यों की समझ मिलती है. यही कारण है कि इस डिप्लोमा को केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इच्छुक अभ्यर्थियों से समय रहते प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है.