मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल आपकी हड्डियों और जोड़ों को बना रहा कमजोर
स्मार्टफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल अब सिर्फ आंखों और गर्दन तक सीमित समस्या नहीं रह गया है. डॉक्टरों के मुताबिक, रोजाना 8 से 10 घंटे तक मोबाइल हाथ में पकड़ने, लगातार टाइपिंग, स्क्रॉलिंग और गेम खेलने से अंगूठे, उंगलियों और हाथ के छोटे जोड़ों पर दबाव बढ़ सकता है. इससे दर्द, थकान और जकड़न जैसी शिकायत हो सकती है. लगातार दर्द या जकड़न होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
स्मार्टफोन अब जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा और लगातार इस्तेमाल शरीर के लिए परेशानी का कारण भी बन रहा है. अब तक मोबाइल के अधिक इस्तेमाल को आंखों, गर्दन और कंधों से जुड़ी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन लंबे समय तक फोन हाथ में पकड़े रहने से अंगूठे, उंगलियों और हाथ के छोटे-छोटे जोड़ों में दर्द और जकड़न की शिकायत भी सामने आ सकती है.
डॉक्टरों के मुताबिक, करीब 200 से 250 ग्राम वजन वाले स्मार्टफोन को रोजाना 8 से 10 घंटे तक हाथ में पकड़े रहने से हाथों की मांसपेशियों और जोड़ों पर लगातार दबाव पड़ता है. इसके अलावा मोबाइल पर लंबे समय तक टाइपिंग, स्क्रॉलिंग और गेम खेलने जैसी गतिविधियों में अंगूठे और उंगलियों का बार-बार इस्तेमाल होता है. इससे हाथों में थकान, दर्द और जकड़न जैसी समस्या हो सकती है.
अंगूठे और उंगलियों पर सबसे ज्यादा असर
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. फहीम अंसारी के मुताबिक, मोबाइल का लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने वालों में अंगूठे और उंगलियों के छोटे जोड़ों पर बार-बार एक जैसी गतिविधि करने से परेशानी बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि मोबाइल पर टाइपिंग, लगातार स्क्रॉलिंग या गेम खेलने के दौरान अंगूठे पर अपेक्षाकृत ज्यादा दबाव पड़ता है. शुरुआत में यह समस्या हल्के दर्द, थकान या असहजता के रूप में दिखाई दे सकती है.
अगर व्यक्ति लंबे समय तक इस पर ध्यान नहीं देता और मोबाइल का इस्तेमाल इसी तरह जारी रखता है तो दर्द और जकड़न की समस्या बढ़ सकती है. खासकर वे लोग जो काम, पढ़ाई या मनोरंजन के लिए कई घंटे लगातार स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें हाथों और उंगलियों को पर्याप्त आराम देने की जरूरत है.
फोन को लगातार हाथ में पकड़ने से बचें
डॉक्टरों के अनुसार, मोबाइल का इस्तेमाल करते समय फोन को लगातार हाथ में पकड़कर रखने के बजाय फोन स्टैंड या दूसरे सहायक साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे हाथों और उंगलियों पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करना जरूरी हो तो बीच-बीच में ब्रेक लेना भी महत्वपूर्ण है.
कुछ समय के लिए फोन नीचे रखकर हाथों और उंगलियों को आराम देने से लगातार पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है. मोबाइल इस्तेमाल करते समय फोन को एक ही हाथ से लगातार पकड़ने और उसी अंगूठे से लंबे समय तक स्क्रॉलिंग या टाइपिंग करने से भी बचना चाहिए.
सिर्फ हाथ नहीं, गर्दन और कंधे भी हो रहे प्रभावित
मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल का असर सिर्फ हाथों और उंगलियों तक सीमित नहीं है. लंबे समय तक मोबाइल देखते हुए गर्दन झुकाकर बैठने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इस वजह से गर्दन और कंधों में दर्द के साथ सिरदर्द जैसी शिकायत भी हो सकती है.
लगातार एक ही मुद्रा में बैठकर मोबाइल देखने से शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों पर खिंचाव बढ़ सकता है. इसलिए मोबाइल इस्तेमाल करते समय केवल स्क्रीन टाइम कम करना ही नहीं, बल्कि फोन पकड़ने और बैठने की मुद्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है.
मोबाइल जरूरी है, लेकिन इस्तेमाल का तरीका भी महत्वपूर्ण
डॉ. फहीम अंसारी के मुताबिक, मोबाइल तकनीक आज रोजमर्रा की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुकी है. काम, पढ़ाई, बैंकिंग, खरीदारी और बातचीत से लेकर मनोरंजन तक कई गतिविधियां स्मार्टफोन के जरिए होती हैं. ऐसे में मोबाइल का पूरी तरह इस्तेमाल बंद करना व्यावहारिक नहीं है.
हालांकि, इसके अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली शारीरिक परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. मोबाइल का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक और सीमित समय तक करना बेहतर है. जिन लोगों के काम में लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल जरूरी है, उन्हें नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना चाहिए.
दर्द और जकड़न को नजरअंदाज न करें
यदि मोबाइल इस्तेमाल करने के बाद लगातार अंगूठे, उंगलियों या हाथ के जोड़ों में दर्द, जकड़न या थकान महसूस हो रही है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लगातार बनी रहने वाली समस्या की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
स्मार्टफोन का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसमें छोटे बदलाव भी हाथों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकते हैं. फोन स्टैंड का इस्तेमाल, नियमित ब्रेक, हाथ बदलकर मोबाइल का इस्तेमाल करना और लगातार टाइपिंग या स्क्रॉलिंग से बचना मददगार हो सकता है.
