फिर दो हिस्सों में बंटेगा कानपुर? विधानसभा में अलग जिला बनाने का प्रस्ताव, शासन ने मांगी रिपोर्ट

कानपुर के विभाजन की कवायद फिर तेज हो गई है, जिसमें दक्षिण कानपुर को अलग जिला बनाने की पुरानी मांग ने जोर पकड़ा है. बीजेपी विधायक महेश त्रिवेदी ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया है, जिसके बाद शासन ने जिला प्रशासन से 30 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है.

क्या दक्षिण कानपुर बनेगा अलग जिला? शासन ने 30 दिन में मांगी रिपोर्ट Image Credit:

कभी मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट कहे जाने वाले कानपुर को दो जिलों में बांटकर दक्षिण क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है. किदवई नगर से भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया है. उनके प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शासन और जिला प्रशासन से 30 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है.

महेश त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजने के साथ विधानसभा में नियम 301 के तहत कानपुर को दो जिलों में बांटने का प्रस्ताव रखा था. उनका कहना है कि बढ़ती आबादी और लगातार फैलते शहरी क्षेत्र को देखते हुए प्रशासनिक सुविधाओं के लिए यह जरूरी हो गया है. प्रस्ताव में इसके पक्ष में आबादी, कानून-व्यवस्था जैसे करीब 10 कारण भी बताए गए हैं.

35 सालों से दक्षिण को जिला बनाने की मांग

यह मांग कोई नई नहीं है. करीब 35 वर्षों से अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि समय-समय पर कानपुर दक्षिण को अलग जिला बनाने की आवाज उठाते रहे हैं. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी कहा कि वह साल 1991 से इस मांग को उठाते रहे हैं. उनके मुताबिक विधानसभा में जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर नियम के अनुसार कार्रवाई की जाती है.

भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी की ओर से प्रस्ताव में बढ़ती आबादी, कानून-व्यवस्था, लोगों को सरकारी सुविधाएं आसानी से मिलना और क्षेत्र का बेहतर विकास जैसे मुद्दे को भी उठाया गया है. वहीं, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जिला बनाने का फैसला शासन स्तर पर होता है. शासन से पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन जरूरी रिपोर्ट तैयार कर भेजेगा.

पहले भी बदल चुका है कानपुर का नक्शा

कानपुर और कानपुर देहात के बीच प्रशासनिक सीमाओं में पहले भी बदलाव हो चुका है. 1977 में कानपुर से अलग कर कानपुर देहात जिला बनाया गया था. 1979 में इसे फिर कानपुर में मिला दिया गया. इसके बाद 23 अप्रैल 1981 को कानपुर देहात को दोबारा अलग जिला बनाया गया. 2022 में दक्षिण क्षेत्र को तहसील बनाने की चर्चा भी सामने आई थी.

जिला बनाना आसान नहीं, शासन के पाले में गेंद

अब दक्षिण क्षेत्र को जिला बनाने की मांग ने फिर जोर पकड़ा है. अलग जिला बनाने के लिए केवल राजनीतिक घोषणा काफी नहीं होगी. प्रशासन को आबादी, क्षेत्रफल, भौगोलिक स्थिति, तहसीलों और थानों की संख्या, प्रशासनिक जरूरतों जैसी कई बातों का अध्ययन करना होगा. नए कलेक्ट्रेट समेत सरकारी कार्यालयों के लिए जमीन और बजट भी देखी जाएगी.

वहीं, रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव शासन और राजस्व परिषद के स्तर पर जांचा जाएगा. सभी पहलुओं पर सहमति बनने के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी और फिर अधिसूचना जारी होने पर ही नया जिला अस्तित्व में आ सकेगा. फिलहाल गेंद शासन के पाले में है और अब सबकी नजर 30 दिन में तैयार होने वाली रिपोर्ट पर टिकी है.

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