‘बारिश कम होगी, धान छोड़कर दलहन-तिलहन की करें बुवाई’, किसानों से मंत्री की अपील

उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका के बीच कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सरकार ने संभावित संकट को देखते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है, किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ऐसे में पारंपरिक धान की खेती के बजाय दलहन और तिलहन की खेती को प्राथमिकता दें.

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही

उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून को लेकर चिंता बढ़ गई है. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने खुद किसानों को अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है, मौसम वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक पहले जहां 92 प्रतिशत औसत वर्षा की संभावना जताई जा रही थी, वहीं अब यह घटकर 88 प्रतिशत या उससे भी कम रह सकती है, ऐसे में योगी सरकार किसानों को फसल विविधीकरण और वैकल्पिक खेती अपनाने की सलाह दे रही है.

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सुपर अल-नीनो और समुद्री तूफानों के असर से इस बार मानसून कमजोर पड़ सकता है, इसका सीधा असर खेती-किसानी और सिंचाई संसाधनों पर दिखाई देगा, खासकर उत्तर भारत के किसानों को इसके लिए पहले से तैयार रहने की जरूरत है. मंत्री ने कहा कि सरकार ने संभावित संकट को देखते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है, किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है.

दलहनी फसलों के बीजों पर 50% की सब्सिडी

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि दलहनी फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं और बारिश पर ज्यादा निर्भरता है, वहां पारंपरिक धान की खेती के बजाय दलहन और तिलहन की खेती को प्राथमिकता दें. उनका कहना है कि इससे कम बारिश की स्थिति में भी किसानों को नुकसान कम होगा और आय पर असर नहीं पड़ेगा.

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने यह भी कहा कि यदि किसान धान की खेती करना चाहते हैं तो उन्हें डीएसआर यानी डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक अपनानी चाहिए, यह तकनीक पानी की खपत को काफी कम करती है और बदलते मौसम के बीच बेहतर विकल्प साबित हो सकती है, सरकार ने सूखे जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं भी शुरू की हैं.

सरकार चला रही है यूपी एग्रीस परियोजना

कृषि मंत्री ने बताया कि विश्व बैंक के सहयोग से उत्तर प्रदेश में करीब चार हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यूपी एग्रीस परियोजना संचालित की जा रही है. इसमें राज्य सरकार भी लगभग 700 करोड़ रुपये का योगदान दे रही है.

इस परियोजना के तहत बुंदेलखंड, विंध्य क्षेत्र, पूर्वांचल और कम उत्पादकता वाले जिलों के चयनित ब्लॉकों में किसानों को मुफ्त बीज, आधुनिक कृषि उपकरण और अन्य जरूरी कृषि संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. सरकार का दावा है कि जलवायु परिवर्तन और कमजोर मानसून की चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक खेती और नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि वे मौसम के बदलते रुझानों के अनुसार अपनी खेती की रणनीति तय कर सकें.

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