‘आज सारे मुकदमों की सुनवाई मैं करूंगी…’, जिला जज की कुर्सी पर जबरन बैठी महिला

वाराणसी कोर्ट में एक अप्रत्याशित घटना सामने आई, जब एक 50 वर्षीय महिला जिला जज की कुर्सी पर बैठ गईं और "ऑर्डर-ऑर्डर" चिल्लाने लगीं. उन्होंने खुद सुनवाई करने का प्रयास किया, जिससे अदालत में हड़कंप मच गया. काफी देर तक यह हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा, आखिर में पुलिस ने महिला को हटाकर थाने ले गई.

वाराणसी कोर्ट में महिला का हाई-वोल्टेज ड्रामा, जज की कुर्सी पर बैठी

वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय में शुक्रवार को एक हैरान करने वाली घटना घटी, जिससे अदालत में हड़कंप मच गया. जहां एक 50 वर्षीय महिला सीधा अदालत कक्ष में पहुंचकर जिला जज की डायस पर चढ़ गई. कुर्सी पर बैठते ही हैमर उठाकर मेज पर पटकना शुरू कर दिया और जोर-जोर से ‘ऑर्डर-ऑर्डर’ चिल्लाने लगी. इससे अदालत में शोर-शराबा शुरू हो गया.

जानकारी के मुताबिक, वाराणसी के शिवपुर की रहने वाली वंदना गुप्ता पति बृज गुप्ता न्यायालय परिसर में पहुंची थी. उसने पहले जिला जज के आने का समय पूछा और सीधा अदालत कक्ष में पहुंचकर जज की कुर्सी पर बैठ गईं. इतना ही नहीं, महिला ने कहा कि आज अदालत की सुनवाई वह ख़ुद करेगी और सभी लोग अपने गवाह और सबूत पेश करें.

महिला पुलिस ने वंदना गुप्ता को डायस से हटाया

महिला के इस हरकत से अदालत में हड़कंप मच गया. शोर सुनकर आस-पास के अन्य कर्मचारी, अधिवक्ता और पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंच गए और महिला को कुर्सी से हटाने का प्रयास करने लगे. लेकिन महिला ने उन सभी से उलझना शुरू कर दिया. आखिर में कोर्ट की सुरक्षा में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर ने महिला पुलिस बुलाकर वंदना गुप्ता को डायस से हटाया.

पुलिस ने महिला को लेकर कैंट थाने ले गई है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि महिला की मानसिक स्थिति कैसी है? जानकारी के मुताबिक, महिला पहले भी इस तरह के काम कर चुकी है. फिलहाल महिला को उसके घर पहुंचा दिया गया है और घर वालों को महिला की देख रेख करने की सलाह दी गई है ताकि वो फिर से ऐसा कोई काम ना करें.

महिला को कोर्ट परिसर में प्रवेश ना देने के निर्देश

इस घटना के समय जिला जज अवकाश पर थे. जिसके कारण अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई दूसरी अदालत में चल रही थी. महिला की इस हरकत ने न केवल अदालत के कामकाज को बाधित किया बल्कि वहां उfपस्थित सभी लोगों को भी असहज कर दिया. वहीं, कोर्ट प्रशासन ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वो महिला दोबारा न्यायालय परिसर में प्रवेश ना करे.

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