‘मेरी पुज्य शंकराचार्य से…’, केशव प्रसाद मौर्य ने फिर की विरोध त्यागने की विनती; अब तक क्या-क्या हुआ?
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार आठ दिनों से धरने पर हैं. प्रशासन द्वारा कथित दुर्व्यवहार के विरोध में यह गतिरोध जारी है. अब सरकार भी नरम नजर आ रही है और मनाने की पहल तेज है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर उन्हें भगवान कहते हुए विरोध खत्म करने की प्रार्थना की है.
प्रयागराज माघ मेला में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार आठ दिनों से धरने पर बैठे हैं. इस अवधि में कथित रूप से नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ जोड़ने पर सवाल, शिविर के बाहर उपद्रव और उनके द्वारा बाल शोषण करने जैसे गंभीर आरोप भी लगे. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर हमलावर हैं, साथ ही गतिरोध समाप्त करने के विचार में नजर नहीं आ रहे हैं.
माघ मेले में संत के अपमान से शुरू हुई यह लड़ाई अब राजनीतिक रूप ले चुकी है. विपक्ष समेत कई साधु-संत इसे सनातन का अपमान बतात रहे हैं. इस बीच अब नरम रुख अपनाते हुए शंकराचार्य को मनाने का शिलशिला शुरू हो गया है. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक फिर से शंकराचार्य को जगद्गुरु और भगवान बताते हुए विरोध त्यागकर पवित्र संगम में स्नान करने की प्रार्थना की है.
CM के स्तर से प्रयास किया जा रहा, मेरे स्तर से प्रार्थना
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार शाम मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैंने प्रार्थना की है भगवान शंकराचार्य से कि वो अपना विरोध को समाप्त करके पवित्र संगम में स्नान करके एक अनुकुल संदेश देने की कृपा करें. मेरी हाथ जोड़कर विनती है, प्रार्थना है. मैं फिर से उनसे प्रार्थना करता हूं कि वह विरोध को त्याग कर संगम में स्नान करें. इससे एक अच्छा संदेश जाए, ऐसी मेरी पुज्य शंकराचार्य से प्रार्थना है.
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का हम सम्मान करते हैं. प्रयागराज के माघ मेला में आएं, हम उनका स्वागत करते हैं. जो भी विरोध है, उसको समाप्त करें. हम लोग उसकी जांच कराएंगे, जो भी हो होगा उसका समाधान निकाला जाएगा. सरकार की ओर से कोई पहल क्यों नहीं की जा रही है… इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘ सीएम के स्तर से जो भी प्रयास किया जा रहा वो किया जा रहा है. मेरे स्तर से प्रार्थना की जा रही है.’
शंकराचार्य के ‘CM बनने’ वाले बयान पर क्या कुछ बोले?
इससे पहले जब केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे आदरपूर्वक अपील की थी तो शंकराचार्य ने उन्हे एक ‘समझदार व्यक्ति’ बताया हुए सीएम बनने की बात कही थी. डिप्टी सीएम ने कहा, ‘वो शंकराचार्य हैं, ये कोई राजनीतिक नहीं है. किसको सीएम होना चाहिए, नहीं होना चाहिए. क्योंकि वो एक बहुत बडे़ संत हैं, जगद्गुरु शंकराचार्य हैं. इसलिए उनके द्वारा कोई बात कही गई और उसपर टिप्पणी करूं, वो मर्यादा नहीं है. लेकिन यह सब तय करना हमारी पार्टी का काम है.’
प्रयागराज में आप मिलने जाएंगे, इसपर डिप्टी सीएम ने कहा, ‘मैं उनके पास नहीं जा रहा, अभी मेरा जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है.’ केशव प्रसाद मौर्य कहते हैं कि अगर मुझे बात करने के लिए कहा जायेगा, जाऊंगा. मैं शंकराचार्य जी के चरणों में शीश झुकाकर विवाद खत्म करने की प्रार्थना कर रहा हूं.
प्रशासन का नोटिस, शिविर पर किया गया उपद्रव
यह विवाद माघ मेला में मौनी अमावस्या (18 जनवरी) के दिन सुबह में शुरू हुआ, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पालकी के साथ अपने भक्तों और समर्थकों के साथ संगम नोज पर पवित्र स्नान के लिए जा रहे थे. इस दौरान मेला प्रशासन ने पालकी को जाने से रोका दिया और पैदल जाने को कहा. शंकराचार्य ने दुर्व्यवहार, समर्थकों पर अत्याचार औऱ चोटी खिंचकर मारने का आरोप लगाया. साथ ही अपमान से आहत होकर शिविर के बाहर विरोध में धरने पर बैठ गए.
सेक्टर चार, त्रिवेणी मार्ग उत्तरी पटरी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शिविर स्थित है. इस विवाद के 48 घंटे में प्रशासन ने उनको दो नोटिस थमा दिए. एक में मौनी अमावस्या के दिन नियम का उल्लंघन, शंकराचार्य के नाम पर सवाल दूसरे में मेला परिसर बैन क्यों नहीं किया जाए को लेकर था. इसके बाद बीते शनिवार शाम उनके शिविर क बाहर हंगामा किया गया, साथ ही ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ के नारे लगाए गए, इसपर तहरीर भी दी गई है.
रामभद्राचार्य के शिष्य ने लगाया बाल शोषण के आरोप!
इस बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य ने शंकराचार्य पर बड़े और गंभीर आरोप लगाते हुए दो शिकायत कराई है. उन्होंने पर उनके शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखने, उनसे निजी सेवा कराने का आरोप लगाया. डो बाल शोषण है, जो बाल अधिकार औऱ श्रम कानूनों का उल्लंघन है. इसके अलावा, उनके शिविर में अवैध हथियार होन की आशंका को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई है.
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिना नाम लिए कालनेमि और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के औरंगजेब वाले बयान ने भी विवाद को हवा दी. शंकराचार्य अपने अपमान को लेकर शिविर के बाहर डटे हुए हैं. विरोध खत्म करने पर उनका कहा है कि, ‘जिन्होंने शुरू किया है, उन्हीं को निर्णय लेना है. हम चाह कर भी ये नहीं कर सकते हैं. जो बिना कारण लाठी मारती हो उसका विश्वास नहीं किया जा सकता. सोमवार को शंकराचार्य के धरने का आठवां दिन है.
