‘राम का नाम लेने वाले भव्य हो रहे हैं’, 50 लाख में रामकथा करने पर बोले कुमार विश्वास

कवि कुमार विश्वास ने 'सत्ता सम्मेलन' में रामकथा शुल्क पर उठते सवालों का बेबाकी से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि राम का नाम लेने वाले भव्य हो रहे हैं, दिव्य हो रहे हैं, जबकि विरोधियों के नीचे से बिस्तर सरक गया है. कुमार विश्वास ने अन्य गायकों की महंगी फीस से तुलना कर रामकथा के आयोजनों पर सवाल उठाने को अनुचित बताया. दूरदर्शन पर रामचरितमानस की उनकी व्याख्या काफी सराही जा रही है.

कवि कुमार विश्वास

टीवी9 भारतवर्ष द्वारा आयोजित खास कार्यक्रम सत्ता सम्मेलन कवि कुमार विश्वास कहा कि राम का नाम लेने वाले भव्य हो रहे हैं, दिव्य हो रहे हैं. उन्होंने 50 लाख में रामकथा के सवाल पर बेबाकी से जवाब दिया. उनसे पूछा गया कि एक बाबा तुलसी थे, जिन्होंने मानस के माध्यम से भगवान राम की कथा को घर घर पहुंचाया. एक कुमार विश्वास हैं, जिनकी कथा के लिए भी 50-50 लाख रुपये की व्यवस्था करनी पड़ती है.

इसके जवाब में कुमार विश्वास ने एक उदाहरण बताया. कहा कि इसी दिल्ली में एक लाख लोग इकट्ठा हुए और एक गायक ने गाना गाया. इस गाने में उसने चार बार शराब की बात की और आठ बार कोई दूसरी बात, लेकिन उसकी टिकट छह लाख में बिक गई. इसमें तो किसी ने नहीं पूछा कि ये गायक छह लाख ले रहा. वहीं राम कथा के आयोजन पर सवाल उठाए जाते हैं.

‘चार्टर में राम वाले’ पर टिप्पणी

कुमार विश्वास ने कहा कि अयोध्या में कार्यक्रम था. आयोजकों ने उन्हें चार्टर में बुलाया तो लोग कहने लगे कि राम वाले चार्टर में चल रहे हैं. कुमार विश्वास ने सवाल उठाया कि ये किसने कह दिया कि केवल हराम वाले ही चार्टर में चलेंगे. इसी के साथ उन्होंने कहा कि अब राम का नाम लेने वाले भव्य हो रहे हैं और दिव्य हो रहे हैं. वहीं राम का विरोध करने वालों के नीचे से बिस्तर सरक गया है. अब वो भी यज्ञोपवीत पहनकर मंदिरों में घूम रहे हैं.

दूरदर्शन पर हो रहा मानस का प्रसारण

कुमार विश्वास ने कहा कि राम चरित मानस अलग अलग भाषाओं में उपलब्ध है. लेकिन अभी तक ऑडियो विजअल में उपलब्ध नहीं था. इसी कड़ी में उन्होंने एक छोटा सा प्रयास किया है. दूरदर्शन पर भगवान राम की आरती के बाद वह रामचरित मानस की ऑडियो विजुअल फार्म में व्याख्या कर रहे हैं. लोग इसे पसंद भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम पर तो हमेशा से सवाल उठता रहा है.

विरोधियों की फूट गई आंख!

कुमार विश्वास ने कहा कि त्रेता युग में भी भगवान राम पर सवाल उठाए गए. पहले तो इंद्र के बेटे ने ही सवाल उठाया. परिणाम स्वरुप उसकी एक आंख से हाथ धोना पड़ा. आज भी जो लोग राम का विरोध कर रहे हैं, उनकी या तो एक आंख फूट गई है या फिर फूटने वाली है. हालांकि यह कहने के साथ ही उन्होंने सफाई भी दी. कहा कि मैं राजनीतिक आंख की बात कर रहा हूं.

कार्यक्रम के दौरान एक सवाल कि कौन सी राजनीतिक पार्टी धर्म सही व्याख्या के साथ है, के जवाब में कुमार विश्वास ने कहा कि पार्टी चाहें कोई भी हो, सभी राम को मानते तो हैं, लेकिन राजनीति के लिए विरोध भी करते हैं. उन्होंने अयोध्या में बाबरी ढांचा गिरने के बाद का एक प्रसंग सुनाया. कहा कि ढांचा गिरने के बाद देश की संसद ने एक कमेटी बनाई थी. यह कमेटी आई तो इसमें शामिल विरोधी खेमे के लोगों ने भी फूल चढ़ाया था.

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