पानी में गल गया सोना, बंदर उठा ले गए पोटली… कोर्ट में पुलिस ने बताई ऐसी कहानी, सिस्टम पर उठ गए सवाल
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पुलिस मालखाने से एक करोड़ का सोना गायब हो गया. कोर्ट ने जब जवाब मांगा तो पुलिस ने बेतुका दावा किया कि सोना पानी में गल गया और बचा हुआ बंदर उठा ले गए. अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए इसे गंभीर कदाचार बताया और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज कर मुआवजे का आदेश दिया है, जिससे पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं.
उत्तर प्रदेश पुलिस के अजब गजब कारनामे अक्सर सामने आते हैं. इसी क्रम में अब उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी का कारनामा सामने आया है. यहां लखीमपुर खीरी सदर कोतवाली पुलिस के मालखाने से करीब एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना गायब हो गया. वहीं जब कोर्ट ने पुलिस ने से पूछा तो पुलिस ने ऐसी कहानी बताई कि हर कोई हैरान रह गया. पुलिस ने बताया कि सारा सोना पानी में गल गया. वहीं, जो बचा उसे बंदर उठा ले गए.
कोर्ट ने पुलिस की इस दलील को ना केवल बकवास बताया, बल्कि इस मामले को गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखते हुए निगेटिव टिप्पणी की है. यह मामला साल 2007 में हुई वारदात से संबंधित है. उस साल दीपावली की रात शहर के कपूरथला मोहल्ले में रहने वाली एक महिला रानी अग्रवाल उर्फ जूली की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम से पहले सारे गहने उतारकर मालखाने में रखवा दिया था. इसमें सोने की चेन, लॉकेट, अंगूठी, नाक की कील और कई भारी चूड़ियां शामिल थीं. इन गहनों की कीमत एक करोड़ से अधिक आंकी गई थी.
दहेज हत्या में दर्ज हुआ था मामला
इस वारदात के संबंध में मृतका के परिजनों ने पति मुदित अग्रवाल समेत अन्य ससुरालियों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था. पुलिस ने मामले में चार्जशीट पेश की. वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान कोर्ट ने जब्त किए गए आभूषण सबूत के तौर पर पेश करने का आदेश दिया, लेकिन पुलिस ये आभूषण प्रस्तुत नहीं कर सकी. आखिर में कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पति मुदित अग्रवाल को फरवरी 2024 में बरी कर दिया था.
पुलिस ने दी ऐसी सफाई
जेल से छूटने के बाद पति मुदित ने कोर्ट में अपने आभूषणों की वापसी की अर्जी लगाई. इसके बाद अदालत ने पुलिस को जमा संपत्ति को रिलीज करने का आदेश दिया. इसके बाद पुलिस ने जो रिपोर्ट पेश की, उसे सुनकर कोर्ट भी हैरान रह गई. पुलिस ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2013 में मालखाने की पोटलियों को धूप दिखाने के लिए छत पर रखा गया था. इसी दौरान आई बारिश में पोटलियां भींग गई. फिर बाद में बंदर इन पोटलियों को उठा ले गए.
अदालत ने खारिज किया पुलिस का तर्क
हालांकि कोर्ट ने पुलिस के इस जवाब को खारिज कर दिया है. अपनी टिप्पणी में कोर्ट ने कहा कि बारिश में सोना नहीं गलता. वहीं यदि करोड़ों रूपये मूल्य की संपत्ति बंदर उठा ले जाते हैं तो इसे जिम्मेदार व्यवस्था का हिस्सा नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि यह साफ तौर पर बहुमूल्य आभूषणों के साथ छेड़छाड़ का मामला है. इसी के साथ कोर्ट ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है.
