लखनऊ में फर्जी आदेश से हथियाई 2 हजार करोड़ की सरकारी जमीन, 38 साल से चल रहा था ‘खेल’; चार पर FIR

लखनऊ में 2 हजार करोड़ की सरकारी जमीन का बड़ा घोटाला सामने आया है. भूमाफिया ने 38 साल पहले चकबंदी विभाग के जाली कागजात बनवाकर जमीन कब्जाई थी. अब इस मामले में चार लोगों पर FIR दर्ज की गई है. अब साल 1988 से लेकर अब तक अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच हो रही है.

2000 करोड़ की सरकारी जमीन फर्जी आदेश से हथियाई, 4 पर FIR Image Credit:

लखनऊ में सरकारी जमीन पर कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसे निजी नाम कराने का बड़ा मामला सामने आया है. आरोप है कि करीब 38 साल पहले चकबंदी विभाग के फर्जी आदेश तैयार कर छह गांवों की करीब 120 बीघा सरकारी जमीन पर निजी लोगों ने अपना हक जता दिया. इस जमीन की मौजूदा कीमत करीब 2 हजार करोड़ रुपये है.

बताया गया है कि साल 1988 और 1989 में ग्राम रसूलपुर कायस्थ की ग्राम सभा की जमीन से जुड़े कुछ आदेश पारित किए गए थे. बाद में जांच में इन आदेशों और उनसे संबंधित पत्रावलियों के कूटरचित होने की बात सामने आई. आरोप है कि इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्जा हासिल कर लिया.

खतौनी में नाम दर्ज कराने हाईकोर्ट पहुंचे

मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब जमीन पर दावा करने वाले पक्ष ने साल 2020 में अपने नाम खतौनी में दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई तो फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं. इस दौरान अधिकारी, भूमाफिया के दावे को सही मानते हुए उसके पक्ष में आदेश करते रहे.

इस मामले में अब सोमवार को 4 आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है. चकबंदी विभाग के निर्देश पर रामेंद्र कुमार, अमित कुमार, सुनील कुमार और लईक खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. साथ ही अब 1988 से लेकर मौजूदा समय तक मामले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच और पड़ताल की जाएगी.

7 अधिकारियों पर विभागीय जांच की सिफारिश

विभाग ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. वहीं, चकबंदी विभाग ने सात अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश भी की है. अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी जमीन पर कब्जा के इस खेल में किस-किस की भूमिका रही? फिलहाल, पूरे मामले की जांच की जा रही है.

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