मस्जिद गिराने के विरोध में सहारनपुर जा रहे थे अजय राय, कांग्रेस कार्यालय से निकलते ही हुए डिटेन

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को सहारनपुर में मस्जिद विध्वंस के विरोध में जाते हुए लखनऊ में हिरासत में लिया गया. पार्टी कार्यालय से निकलते ही पुलिस ने उन्हें डिटेन किया और पुलिस लाइन पहुंचा दिया. कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की तानाशाही और घबराहट बताया, जो विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है. यह कार्रवाई सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को गिराए जाने के दो दिन बाद हुई.

हिरासत में लिए गए अजय राय

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को आज पुलिस ने लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर से हिरासत में लिया है. भारी सुरक्षा के बीच उन्हें पुलिस लाइन ले जाया गया है. मस्जिद पर चले बुलडोजर के खिलाफ विरोध जताने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय प्रतिनिधिमंडल के साथ आज कांग्रेस ऑफिस से सहारनपुर के लिए निकले थे. यह जानकारी खुद कांग्रेस पार्टी ने ही अपने सोशल मीडिया हैंडल से दी है.

UP कांग्रेस के X हैंडल से किए पोस्ट में बताया है कि प्रदेश अध्यक्ष सहारनपुर में मस्जिद ढहाए जाने का विरोध करने जा रहे थे, लेकिन लखनऊ में ही पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया है. इस पोस्ट में कहा गया है कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पुरानी मस्जिद को प्रशासन द्वारा बुलडोजर से ढहाया गया है. वहां की जमीनी स्थिति जानने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जा रहे थे. पार्टी कार्यालय से निकलते ही प्रदेश सरकार ने तानाशाही रवैये के तहत उन्हें गिरफ्तार किया है.

सामने आई सरकार की बौखलाहट

कांग्रेस पार्टी ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह कार्रवाई साफ तौर पर भाजपा सरकार की घबराहट और बौखलाहट को बयां करती है. सरकार सच्चाई सामने आने और विपक्ष की आवाज से इतनी डर गई है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से जायजा लेने जा रहे नेताओं को भी जबरन रोकना चाहती है. भाजपा की यह दमनकारी नीतियां कांग्रेस के बुलंद हौसलों को नहीं दबा सकतीं. अजय राय के साथ जा रहे कांग्रेस के नेताओं में मौलाना इस्लाही, रुद्र दमन सिंह “बबलू”, लल्लन कुमार, राजेश जायसवाल, बद्री विशाल तिवारी और सलीम अख्तर शामिल थे.

दो दिन पहले ही ध्वस्त हुई मस्जिद

बता दें कि दो दिन पहले ही सहारनपुर जिला प्रशासन ने इस मस्जिद को बुलडोजर से गिराया है. आरोप है कि यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी थी. इस मस्जिद को गिराने की नोटिस के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन कोर्ट गया था, जहां उनकी अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने रातोरात इस मस्जिद को गिरा दिया. इस कार्रवाई का विरोध अब सभी विपक्षी दल कर रहे हैं.

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