14 साल बाद अखिलेश ने प्रयागराज में गुजारी रात, 2012 जैसा करिश्मा भी होगा?

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का प्रयागराज में रात्रि विश्राम एक बार फिर चर्चा में है. 2012 के विधानसभा चुनाव में भी चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश के प्रयागराज में ठहरने के बाद सपा को प्रचंड बहुमत मिली थी. 14 साल बाद अखिलेश यादव ने प्रयागराज में नाइट स्टे किया है. ऐसे में सपाईयों को लग रहा है कि 2012 का करिश्मा 2027 में फिर होगा.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव Image Credit: फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश में चुनावी मौसम आते ही शुभ-अशुभ संकेत, ज्योतिषीय मान्यताएं और राजनीतिक अंधविश्वास की खासी चर्चा है. कभी नोएडा जाने को लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने की चर्चा होती रही, तो कभी किसी खास मंदिर में दर्शन या किसी धार्मिक स्थल पर रात्रि विश्राम को शुभ माना गया. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का प्रयागराज में रात्रि विश्राम एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है.

दरअसल, साल 2012 समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ था. उस चुनाव में अखिलेश यादव ने युवा चेहरे के रूप में पूरे प्रदेश का व्यापक दौरा किया था. उनकी ‘क्रांति रथ यात्रा’ और लगातार जनसंपर्क अभियान ने पार्टी को नई ऊर्जा दी थी. चुनाव परिणाम आए तो समाजवादी पार्टी ने 224 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया और अखिलेश यादव प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने. इसी चुनाव से जुड़ा एक राजनीतिक किस्सा सालों से चर्चा में रहा.

सपा के लिए ‘लकी मोमेंट’ था अखिलेश का ठहरना

बताया जाता है कि 2012 में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान अखिलेश यादव ने प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में रात्रि विश्राम किया था. इसके बाद चुनावी माहौल तेजी से सपा के पक्ष में गया और पार्टी सत्ता तक पहुंच गई. इस कहानी को लेकर कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में इसे एक ‘लकी मोमेंट’ के रूप में जरूर याद किया जाता रहा. कल फिर अखिलेश यादव दो दिवसीय दौरे पर प्रयागराज पहुंचे हैं.

इस दौरान अखिलेश यादव ने शहर में रात्रि विश्राम भी किया. बस इसी घटनाक्रम ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है. एयरपोर्ट से लेकर होटल तक समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया. भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक सड़क किनारे मौजूद रहे. जगह-जगह फूल-मालाओं से स्वागत हुआ और सपा समर्थकों ने नारेबाजी की. अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव केवल राजनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं रहे.

क्या यह महज संयोग है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नेता के कार्यक्रम को केवल अंधविश्वास या टोटके से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि चुनावी राजनीति में प्रतीकात्मक संदेशों का भी महत्व होता है, अगर किसी जगह से किसी नेता की सकारात्मक यादें जुड़ी हों तो वहां जाना या रात्रि विश्राम करना मनोवैज्ञानिक रूप से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा सकता है, इसे राजनीतिक मनोविज्ञान के रूप में भी देखा जा सकता है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति और ‘राजनीतिक मान्यताएं’

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसी चर्चाएं नई नहीं हैं. सालों तक यह धारणा बनी रही कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाएगा, उसकी सत्ता चली जाएगी. इसी वजह से लंबे समय तक कई मुख्यमंत्री नोएडा जाने से बचते रहे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मिथक को तोड़ा. अपने हर नोएडा दौरे के दौरान सीएम योगी इस अंधविश्वास का जिक्र करते हुए कहते हैं कि कुर्सी जाने के डर से कोई सीएम न तो नोएडा आता था और न ही यहां के विकास कार्य पर ध्यान देता था.

मुलायम सिंह यादव की शैली की झलक

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव अब अपने पिता और समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्व. मुलायम सिंह यादव की शैली में भी संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. मुलायम सिंह यादव छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं से सीधे संवाद बनाए रखने के लिए जाने जाते थे. अब अखिलेश भी यूपी के अलग-अलग जिलों में जाकर नेताओं के घर पहुंच रहे हैं और व्यक्तिगत संपर्क बढ़ा रहे हैं.

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