अलीगंज अग्निकांड: जिस बिल्डिंग में 15 लोगों की हुई थी मौत, उसे खुद तोड़ने लगा बिल्डर
लखनऊ के अलीगंज में भीषण अग्निकांड के बाद बिल्डिंग के अवैध हिस्से को गिराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद भवन मालिक ने स्वयं ही अवैध निर्माण तोड़ना शुरू कर दिया. एलडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का निरीक्षण किया और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. इसी भवन में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हुई थी.
राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-डी में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अवैध व्यावसायिक भवन को गिराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद भवन मालिक ने स्वयं ही अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया है. गुरुवार को एलडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का निरीक्षण किया और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
यह वही भवन है, जहां बीते दिनों हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई थी. जांच में भवन को मानकों के विपरीत निर्मित पाए जाने के बाद एलडीए ने इसे अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था. एलडीए के सचिव विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित भूखंड संख्या एमएस-102 पर वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला एवं अन्य द्वारा बिना वैध अनुमति के व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया गया था.
सुनवाई के बाद अवैध घोषित हुआ निर्माण
इस मामले में 23 जून 2026 को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा 27(1) के तहत नोटिस जारी कर भवन स्वामियों से 15 दिनों के भीतर निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था. एलडीए के अनुसार, 7 जुलाई को विहित प्राधिकारी की अदालत में मामले की पहली सुनवाई हुई. भवन स्वामी के अधिवक्ता को आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया गया, जिसके बाद 8 जुलाई को आपत्ति प्रस्तुत की गई.
15 दिन का समय मिला
प्रवर्तन जोन-4 की ओर से आपत्ति का जवाब दाखिल किया गया. सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद 10 जुलाई 2026 को विहित प्राधिकारी ने पूरे व्यावसायिक निर्माण को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया. ध्वस्तीकरण आदेश में भवन स्वामियों को स्वयं अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसकी अंतिम तारीख 25 जुलाई 2026 निर्धारित की गई थी.
पहले ही शुरू कर दिया ध्वस्तीकरण
हालांकि समय सीमा समाप्त होने से पहले ही भवन मालिक की ओर से अवैध स्ट्रक्चर को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है. इसकी सूचना मिलने पर एलडीए की प्रवर्तन टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई का निरीक्षण किया. प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने बताया कि ध्वस्तीकरण के दौरान बरसात के मौसम को देखते हुए सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य किया गया है.