चढ़ावा चोरी को लेकर अनिल मिश्रा से बढ़ी तल्खी, मानस की चौपाई के जरिए चंपत राय ने कह दी बड़ी बात

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने ट्रस्ट के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के बीच खुलकर मतभेद सामने आए हैं, दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी से बचने के आरोप लगा रहे हैं. चंपत राय ने एसओपी और एमओयू पर सवाल उठाए हैं, जबकि कोषाध्यक्ष ने भी डॉ. अनिल मिश्र को दानपात्रों का जिम्मेदार ठहराया है. यह खींचतान जांच से आगे बढ़कर ट्रस्ट की आंतरिक कलह को उजागर करती है.

चंपत राय और अनिल मिश्रा Image Credit:

अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के अंदर चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल जांच तक ही सीमित नहीं रहा. बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर बड़ी खींचतान को भी जन्म दे दिया है. ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस मामले में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. दोनों अपनी-अपनी भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट करने में जुटे हैं. आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में दोनों के बीच सामान्य संवाद भी लगभग बंद बताया जा रहा है. सूत्रों का दावा है कि चढ़ावा चोरी उजागर होने के बाद से दोनों की मुलाकात भी नहीं हुई है.

7 जुलाई को चंपत राय ने दो अलग-अलग पत्र जारी किया था. इसमें उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी थी. कहा था कि उन्होंने फिलहाल मौन धारण किया है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. रिपोर्ट आने के बाद वह सभी आरोपों का क्रमवार जवाब देंगे. इसी दौरान उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ प्रोफाइल पर रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई “धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी” को शीर्षक के रूप में लिखते हुए अपना पत्र साझा किया है.

एसओपी और एमओयू पर उठाए सवाल

उसी दिन चंपत राय का एक अन्य पत्र भी सामने आया, जिसमें उन्होंने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और एमओयू को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए. कहा कि चढ़ावा गणना व्यवस्था से संबंधित यह समझौता ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और तत्कालीन बैंक शाखा प्रबंधक गोविंद मिश्र के बीच हुआ था. उनका दावा है कि उन्हें इस समझौते की जानकारी तक नहीं थी. उन्होंने यह भी लिखा कि चोरी की राशि बरामद होने के बाद 13 जून को ट्रस्ट के लेखा कार्यालय ने उन्हें यह एमओयू उपलब्ध कराया.

कोषाध्यक्ष के बयान से बढ़ी सरगर्मी

इस पत्र को चंपत राय द्वारा अपनी जिम्मेदारी से दूरी बनाने और अप्रत्यक्ष रूप से डॉ. अनिल मिश्र तथा संबंधित बैंक अधिकारियों पर सवाल खड़े करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. उधर, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज के बयान से भी सरगर्मी बढ़ गई है. उन्होंने पहले ही सार्वजनिक रूप से कहा है कि दानपात्रों की जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्र के पास थी और उससे जुड़े सवाल उन्हीं से पूछे जाने चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि कोष में धन जमा होने से पहले तक उसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं होती.

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