आजम खान के लिए मुश्किलों का दौर! जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन का क्या है सियासी संदेश

रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण आदेश ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई है. वहीं, राजनीतिक हलकों में इसे आजम खान के खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है. यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है.

आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है जौहर यूनिवर्सिटी Image Credit: फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आजम खान सुर्खियों में हैं. रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि सुनवाई, अभिलेखों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह फैसला लिया गया है, लेकिन यह मामला सिर्फ भवन निर्माण की वैधता तक सीमित नहीं है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर सीधा हमला मानी जा रही है.

जौहर यूनिवर्सिटी सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है. यह आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट था. आजम खान की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान भी है. 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इसकी आधारशिला रखी थी. बाद में अखिलेश सरकार के दौरान इसका विस्तार हुआ और यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया. करीब 1500 बीघे में फैले इस परिसर में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, हॉस्टल, अकादमिक ब्लॉक समेत दर्जनों इमारतें बनाई गईं. अब उसी परिसर में बुलडोजर चलने वाला है.

RDA ने क्या कहा?

रामपुर विकास प्राधिकरण की जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय परिसर की कुल 40 प्रमुख इमारतों में से केवल दो भवनों के नक्शे स्वीकृत मिले. बाकी 38 इमारतों के संबंध में कोई वैध स्वीकृति उपलब्ध नहीं कराई गई. विश्वविद्यालय प्रशासन ने दलील दी कि निर्माण उस समय हुआ, जब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं था, लेकिन सुनवाई के दौरान प्रशासन ने कहा कि उस समय यह क्षेत्र जिला पंचायत के अधीन था और वहां भी भवन निर्माण के लिए अनुमति लेना अनिवार्य था. यही वजह रही कि मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे जिला पंचायत से स्वीकृत कराए गए थे. अगर दो भवनों के लिए अनुमति ली गई, तो शेष भवनों के लिए क्यों नहीं? इसी आधार पर ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया.

अब क्या होगा?

ध्वस्तीकरण आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन को नियमानुसार लगभग 15 दिन का समय दिया जाएगा. अगर इस अवधि में स्वयं अवैध निर्माण नहीं हटाए जाते, तो रामपुर विकास प्राधिकरण कार्रवाई करेगा. साथ ही ट्रस्ट के पास हाईकोर्ट या अन्य सक्षम न्यायालय में आदेश को चुनौती देने का विकल्प भी रहेगा.

कानूनी लड़ाई से ज्यादा राजनीतिक लड़ाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह सिर्फ अवैध निर्माण का मामला नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है. योगी सरकार पिछले कई सालों से ‘बुलडोजर’ को कानून व्यवस्था और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के प्रतीक के रूप में पेश करती रही है. अब वही बुलडोजर समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेता की पहचान माने जाने वाले संस्थान तक पहुंच गया है.

आजम खान पहले ही कई मामलों में घिरे

आजम खान इस समय पहले से कई मामलों में जेल में हैं. भूमि कब्जा, फर्जी दस्तावेज, सरकारी संपत्ति, विश्वविद्यालय भूमि, दो पैन कार्ड समेत कई मुकदमों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में जौहर यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण आदेश उनके राजनीतिक प्रभाव पर एक और बड़ा झटका माना जा रहा है.

सपा के लिए क्यों अहम है यह मामला?

रामपुर और उसके आसपास के जिले लंबे समय तक समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ रहा. आजम खान इस गढ़ के सूत्रधार माने जाते रहे हैं. आज भी इन इलाकों में आजम का सिक्का चलता है. 2024 के लोकसभा चुनाव में आजम खान के कहने पर सपा ने मोरादाबाद से सांसद उम्मीदवार एसटी हसन का टिकट काट दिया था. मोरादाबाद, रामपुर में आजम फैक्टर काफी अहम है. इस पूरे इलाके की राजनीति उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती रही है.

जौहर यूनिवर्सिटी भी उनकी राजनीतिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. अगर इस परिसर पर बुलडोजर चलता है, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि सपा की प्रतीकात्मक राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकता है.

जौहर यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा साल 2005 में मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने की थी. इसका उद्घाटन अखिलेश यादव के शासनकाल में हुआ था. इसलिए भी सपा के लिए यह यूनिवर्सिटी अहम है.

भाजपा का नैरेटिव

भाजपा लगातार यह संदेश देने की कोशिश करती रही है कि कानून सबके लिए बराबर है. सरकार का पक्ष यही है कि मामला पूरी तरह अवैध निर्माण और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सुनवाई, दस्तावेजों की जांच और विधिक प्रक्रिया के बाद ही आदेश जारी हुआ है.

विपक्ष क्या रुख है?

विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की कार्रवाई बता सकता है. समाजवादी पार्टी पहले भी आजम खान के खिलाफ हुई कार्रवाइयों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है.

चुनाव से पहले बड़ा संदेश

2027 चुनाव से पहले भाजपा का फोकस कानून व्यवस्था, बुलडोजर नीति, अवैध कब्जों पर कार्रवाई और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर है. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक उत्पीड़न और चुनिंदा कार्रवाई का मुद्दा बना सकती है यानी जौहर यूनिवर्सिटी अब सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का नया केंद्र बनता दिख रहा है.

क्या यह 2027 का नया चुनावी मुद्दा बनेगा?

राम मंदिर, वक्फ, बुलडोजर, कानून व्यवस्था और अब जौहर विश्वविद्यालय… उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतीकों की हमेशा बड़ी भूमिका रही है. ऐसे में अगर जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर बुलडोजर चलता है, तो उसकी तस्वीरें 2027 विधानसभा चुनाव तक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी रह सकती हैं. यही वजह है कि जौहर यूनिवर्सिटी पर हुई यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश की बदलती चुनावी राजनीति की बड़ी कहानी के रूप में देखी जा रही है.

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