यूपी वालों को बढ़े हुए बिजली दर का लगेगा करंट या मिलेगी राहत, आने वाला है फैसला

उत्तर प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ेंगी या घटेंगी इसको लेकर 20 मई को राज्य सलाहकार समिति की बैठक में फैसला हो सकता है. कंपनियों की तरफ से बिजली आपूर्ति में आने वाले कुल खर्च और वास्तविक राजस्व वसूली के बीच करीब 21 हजार करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था. ऐसे में उनकी तरफ से बिजली दरें बढ़ाने की मांग की जा रही है.

इलेक्ट्रिक कनेक्शन( सांकेतिक तस्वीर) Image Credit:

अगले कुछ दिन यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बेहद अहम होने वाले हैं. जल्द बिजली की नई दरें घोषित की जा सकती हैं. इससे जुड़ी प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. 20 मई को राज्य सलाहकार समिति की बैठक में इसपर अंतिम फैसला हो सकता है. इसके बाद विद्युत नियामक आयोग की तरफ से उस फैसले को मंजूरी दी जा सकती है.

पिछले कुछ समय से पॉवर कॉर्पोरेशन और उपभोक्ताओं के बीच रस्साकशी का दौर चल रहा है. सबसे बड़ा सवाल है कि बिजली की दरें बढ़ाई जाएंगी या फिर उपभोक्ताओं को सरकार की तरफ से राहत दी जाएगी. हालांकि, लोगों का कहना है राजनीतिक और तकनीकी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए लगातार 7वें साल यूपी में बिजली की दरें स्थिर रह सकती है.

बिजली दरों को लेकर जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है

विभाग की तरफ से मार्च और अप्रैल के महीने के ही दौरान बिजली दरें तय करने के लिए जनसुनवाई कि प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है. इस दौरान बिजली कंपनियों की तरफ से वार्षिक राजस्व आवश्यकताओं के दावों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की की आपत्तियों को लेकर नियामक आयोग में सुनवाई हुई थी.

बिजली कंपनियों ने 21 हजार करोड़ रुपये का घाटा दिखाया

कंपनियों के द्वारा जनसुनवाई की प्रक्रिया के दौरान बिजली आपूर्ति में आने वाले कुल खर्च और वास्तविक राजस्व वसूली के बीच करीब 21 हजार करोड़ रुपये का घाटा दिखाया था. कंपनियों की नियामक आयोग से मांग थी कि इस घाटे की भरपाई करने के लिए बिजली की दरों में संशोधन किया जाए. अगर नियामक आयोग कंपनियों के दावे पर राजी हो जाती है तो बिजली की दरों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

‘कंपनियों पर उपभोक्ताओं पर 51 हजार करोड़ रुपये का बकाया’

बिजली कंपनियों को दावे के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि बिजली कंपनियों पर पहले से ही उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस (बकाया) निकल रहा है. जब तक उदय योजना और नियामक नियमों के तहत इस बकाये को उपभोक्ताओं के पक्ष में समायोजन नहीं किया जाता तब तक बिजली की दरें बढ़ाना गलत है.

स्मार्ट मीटर पर आए खर्च को उपभोक्ताओं से वसूलना चाहता है कॉर्पोरेशन

बता दें इस साल प्रदेश भर में विभाग की तरफ से स्मार्ट मीटर लगाने में 3,838 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आया है. कॉर्पोरेशन चाहता है इस खर्च को भी नई दरों में शामिल कर इसे उपभोक्ताओं से वसूला जाए. लेकिन उपभोक्ता परिषद की तरफ से कॉर्पोरेशन की इस दलील का खूब विरोध किया जा रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है केंद्र सरकार के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के मुताबिक स्मा

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