नकली दवाओं पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, जुलाई में दर्ज हुई छठवीं FIR

उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और फर्जी बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए नकली दवाओं का कारोबार करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है. एफएसडीए की जांच के बाद लखनऊ के अमीनाबाद थाने में छह एफआईआर दर्ज की गई हैं. जांच में करोड़ों रुपये की फर्जी खरीद-बिक्री, बिना दवा स्टॉक के कारोबार और नकली बिलों के जरिए दवाओं को वैध दिखाने का खुलासा हुआ है.

योगी सरकार का नकली दवाओं के सिंडिकेट पर एक और बड़ा प्रहार

उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के कारोबार पर योगी सरकार ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और फर्जी बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए नकली दवाओं को बाजार में खपाने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लखनऊ के अमीनाबाद थाने में छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं.

इस कार्रवाई के साथ ही जुलाई महीने में नकली दवाओं के नेटवर्क के खिलाफ दर्ज होने वाली यह छठी बड़ी एफआईआर बन गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एफएसडीए लगातार नकली और अधोमानक दवाओं के कारोबार पर शिकंजा कस रहा है. विभाग का कहना है कि कार्रवाई केवल नकली दवाएं बरामद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिंडिकेट की आर्थिक और सप्लाई चेन को ध्वस्त करने पर फोकस किया जा रहा है.

करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग का खुलासा

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया कि लखनऊ के अमीनाबाद स्थित मिश्रा एसोसिएट्स, रायबरेली के बछरावां स्थित मिश्रा मेडिकल एजेंसी, अमीनाबाद की श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स, भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा के बीच बिना किसी वास्तविक दवा की खरीद-बिक्री के केवल कागजों पर बिल बनाए जा रहे थे. इन फर्मों के बीच क्रॉस-बिलिंग दिखाकर नकली दवाओं को वैध कारोबार का रूप दिया जा रहा था.

इतना ही नहीं, कई मामलों में बैंकिंग लेनदेन भी वास्तविक नहीं पाया गया. फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर करोड़ों रुपये का कारोबार दर्शाया गया. इसी आधार पर मनीष मिश्रा, आमोद कुमार मिश्रा, सन्नी कश्यप, देवेंद्र शुक्ला और राहुल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

मौके पर पहुंचे अधिकारी, दवा स्टॉक ही नहीं मिला

एफएसडीए की जांच में सबसे बड़ा खुलासा भौतिक सत्यापन के दौरान हुआ. जांच टीम जब भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा के पते पर पहुंची तो वहां किसी भी प्रकार का दवा स्टॉक नहीं मिला. जबकि रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये की खरीद-बिक्री दर्ज थी. फर्मों की प्रोपराइटर अमरीन अहसन और मंतशा ने लिखित बयान में बताया कि उनकी जानकारी के बिना देवेंद्र शुक्ला इन फर्मों का संचालन कर रहा था. जांच अधिकारियों को मौके पर कोई दवा नहीं मिली.

ब्रांडेड दवा की कीमत ने खोल दी पोल

एफएसडीए अधिकारियों को जांच के दौरान एक और बड़ा सुराग मिला. रिकॉर्ड में दिखाया गया कि Augmentin Duo 625 जैसी ब्रांडेड एंटीबायोटिक दवा की खरीद लगभग 56.60 रुपये प्रति स्ट्रिप दिखाई गई थी, जबकि उसकी वास्तविक लैंडिंग कॉस्ट करीब 116.70 रुपये थी. जब संबंधित अधिकृत वितरक मेडी किंग फार्मा से जानकारी मांगी गई तो उसने लिखित रूप से ऐसी किसी भी बिक्री से इनकार कर दिया. इससे जांच एजेंसियों का संदेह और मजबूत हो गया कि बाजार में नकली दवाओं की सप्लाई की जा रही थी और फर्जी बिलों के जरिए उसे वैध दिखाया जा रहा था.

जुलाई में लगातार छठी एफआईआर

एफएसडीए ने जुलाई महीने में नकली दवाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है. 6 जुलाई को आलमबाग में नकली दवाओं की खेप पकड़ी गई और पहली एफआईआर दर्ज हुई. 16-17 जुलाई को बिना लाइसेंस दवा भंडारण और परिवहन के मामलों में कार्रवाई की गई. 19 जुलाई को अमीनाबाद स्थित एक अवैध गोदाम से करीब 21 लाख रुपये मूल्य की नकली दवाएं बरामद हुईं. 24 और 25 जुलाई को फर्जी बिलिंग से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की गई. 29 जुलाई को इस सिंडिकेट के खिलाफ छठी एफआईआर दर्ज कर पूरे नेटवर्क पर शिकंजा और कस दिया गया.

राजस्थान और उत्तराखंड तक फैला नेटवर्क

एफएसडीए की जांच अब उत्तर प्रदेश से बाहर भी पहुंच चुकी है. जांच में सामने आया है कि अमीनाबाद से बरामद नकली दवाओं का मुख्य स्रोत राजस्थान से जुड़े कुछ कारोबारी हैं. उनके खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा उत्तराखंड के देहरादून में नकली दवाओं का निर्माण करने वाली एक अवैध फैक्ट्री पर भी छापेमारी की गई है. वहां चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसकी सभी कड़ियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है.

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