अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन पर लखनऊ DM-ADM को HC की फटकार, लगाया 20-20 हजार का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने DM और ADM (न्यायिक) पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. यह जुर्माना अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मामला दर्ज करने और याचिकार्ता को परेशान करने के लिए लगाया गया. अदालत ने माना कि दोनों अधिकारियों ने यूपी रेवेन्यू कोड 2006 का उल्लंघन किया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट Image Credit:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मामला दर्ज करने पर लखनऊ के DM और ADM (न्यायिक) पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई कानून के दायरे से बाहर थी और याचिकाकर्ता को बिना कारण परेशान किया गया. यह जुर्माना दोनों अधिकारियों को अपने निजी खाते से 6 सप्ताह में चुकाना होगा.

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस पंकज भाटिया ने आरपी सिंह बनाम निवास कॉलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में यह आदेश दिया. साथ ही क्षेत्राधिकार के बिना शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने यूपी रेवेन्यू कोड 2006 का उल्लंघन किया है, जिससे याचिकाकर्ता को कठिनाई उठानी पड़ी.

DM ने बिना अधिकार क्षेत्र के शिकायत स्वीकार की

अदालत ने यह भी पाया कि यह शिकायत एक वकील द्वारा की गई थी, जिसकी भूमि से कोई संबंध नहीं था. वकील ने मामले में याचिकाकर्ता को पत्र लिखकर दावा किया कि यह भूमि अवैध तरीके से खरीदी गई है. इसपर जब याचिकाकर्ता ने जबाव नहीं दिया तो वकील ने जिलाधिकारी को इसकी शिकायत की और जमीन पर अवैध गतिविधियां होने का आरोप लगाया.

इसके बाद जिलाधिकारी ने सीधे ADM (न्यायिक) को भेजा, जिन्होंने बिना जांच किए, जमीन बेचने और उसपर किसी तरह का निर्माण करने पर रोक लगाया. अंत में मजबूर होकर याचिकाकर्ता को इसे हाईकोर्ट में चुनौती देना पड़ा. अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में लेखपाल की भूमिका होती है, लेकिन जिलाधिकारी ने बिना अधिकार क्षेत्र के सीधे शिकायत स्वीकार की.

‘याचिकाकर्ता को अदालत आने को मजबूर किया गया’

कोर्ट कहा, ‘DM ने यह जांचने की भी जरूरत नहीं समझी कि उनके पास अधिकार क्षेत्र है या नहीं. वहीं ADM (न्यायिक) ने बिना किसी विचार और संतुष्टि के ऐसा आदेश पारित किया. दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना इसलिए लगाया जाता है क्योंकि उन्होंने याचिकाकर्ता को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस अदालत आने को मजबूर किया.’

साथ ही कोर्ट ने आदेश के अनुसार, रिट याचिका स्वीकार कर ली. वहीं, आज से छह सप्ताह की अवधि के भीतर दोनों अधिकारियों को जुर्माना निजी खाते से, न कि राज्य कोष से करने के आदेश दिए हैं. साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर याचिकाकर्ता के पास खर्च जमा नहीं करते हैं, तो इसे इस न्यायालय की अवमानना ​​माना जाएगा.

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