लखनऊ कोर्ट में बवाल पर HC नाराज, तीन अफसर तलब; पूछा- पुलिस क्यों रही खामोश?

लखनऊ हाईकोर्ट ने जिला अदालत में वकीलों की वेशभूषा में कथित गुंडागर्दी और पुलिस की निष्क्रियता पर सख्त रुख अपनाया है. चार घंटे चले उपद्रव के दौरान पुलिस की खामोशी पर सवाल उठाते हुए, हाई कोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त समेत वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है.

लखनऊ HC ने जिला कोर्ट में पुलिस की चूक पर सवाल उठाए

लखनऊ हाईकोर्ट ने जिला अदालत परिसर में अधिवक्ताओं की वेशभूषा में कथित गुंडागर्दी और पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब कथित अतिक्रमणकारी और उपद्रवी चार घंटे तक परिसर में उत्पात मचाते रहे, तब अतिरिक्त पुलिस बल क्यों नहीं बुलाया गया?

जस्टिस राजन रॉय और जज मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था), डीसीपी सेंट्रल और एसीपी कैसरबाग को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया है. कोर्ट ने पुलिस से तत्काल कार्रवाई न करने का कारण पूछा है. साथ ही उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए हैं.

वकीलों की वेशभूषा में कोर्य में की गई मारपीट

यह मामला 21 जुलाई को कैसरबाग स्थित जिला अदालत परिसर में हुई मारपीट और बवाल से जुड़ा है. आरोप है कि अधिवक्ताओं की वेशभूषा में बड़ी संख्या में लोगों ने दयानंद सेवा संस्थान के विवादित परिसर में जबरन प्रवेश किया, कर्मचारियों और मजदूरों के साथ मारपीट की, तोड़फोड़ की और सीसीटीवी कैमरे भी क्षतिग्रस्त कर दिए.

घटना के वीडियो सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वीडियो में पुलिसकर्मी घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद आरोपियों के प्रति नरम रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं. अदालत ने पूछा कि सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले घटनाक्रम के दौरान प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

जांच रिपोर्ट और घटना के सभी वीडियो भी मांगे

पुलिस चार घंटे तक मूकदर्शक क्यों बनी रही. अदालत ने पुलिस आयुक्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि मौके पर मौजूद पुलिस ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की. कोर्ट ने राज्य सरकार से एसीपी कैसरबाग की जांच रिपोर्ट और घटना के सभी वीडियो भी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है.

हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को जिला अदालत मारपीट मामले से संबंधित लंबित जनहित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है. इसके साथ ही  लखनऊ के पुलिस आयुक्त को जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सक्षम सिंह की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिया है. घटना दिल्ली से आए कुछ वकीलों और उनके मुवक्किल पर कथित हमले से जुड़ा है.

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