कौन हैं इस्तीफा देने वाले IAS रिंकू सिंह? वकीलों के सामने की थी उठक बैठक, पिता चलाते थे आटा चक्की
आईएएस रिंकू सिंह राही ने पद से इस्तीफा देकर सुर्खियों में हैं. आटा चक्की चलाने वाले पिता के बेटे रिंकू ने 2009 में 100 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ और 7 गोलियां लगीं थीं. दिव्यांग कोटे से 2022 में आईएएस बने रिंकू शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठक-बैठक के लिए भी चर्चित रहे. उनका यह सफर संघर्षों और चुनौतियों से भरा है.
यूपी कैडर में 2022 बैच के आईएएस अफसर रिंकू सिंह राही नौकरी से इस्तीफा देकर सुर्खियों में हैं. करीब आठ महीने से साइडलाइन रिंकू सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा है. इससे पहले रिंकू सिंह उस समय सुर्खियों में आए थे, जब शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान वकीलों के सामने उठक बैठक लगाई थी. साल 2009 में भ्रष्टाचार के एक बड़े खेल का खुलासा करके भी चर्चा में थे. उस समय भ्रष्टाचारियों ने उनकी हत्या की कोशिश की थी.
आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये रिंकू सिंह हैं कौन और कैसे आईएएस कुर्सी तक पहुंचे? सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक आईएएस रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई 1982 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में हुआ था. रिंकू सिंह के पिता आटा चक्की चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे. रिंकू सिंह बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे. उन्होंने सरकारी स्कूल से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा हासिल की. इसके बाद अच्छे नंबरों से 12वीं पास करने की वजह से उन्हें स्कॉलरशिप मिली तो वह ग्रेजुएशन के बाद टाटा इंस्टीट्यूट में बीटेक करने चले गए.
2009 में हुआ था जानलेवा हमला
दलित समुदाय से संबंध रखने वाले रिंकू सिंह राही ने साल 2004 में यूपी-पीसीएस की परीक्षा पास की थी. इसके बाद उन्हें समाज कल्याण अधिकारी बनाया गया. उन्हें पहली पोस्टिंग साल 2008 में मिली. मुजफ्फरनगर में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए 100 करोड़ के स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा किया था. इसी वजह से उनके ऊपर जानलेवा हमला हुआ. इसमें उन्हें सात गोलियां लगी थीं. इससे उनका चेहरा बिगड़ गया, कान खराब हो गया और एक आंख की रोशनी चली गई थी.
दिव्यांग कोटे से बने आईएएस
इस हमले के बाद लंबे समय तक उनका इलाज चला और वह जिंदा बच गए. दोबारा ड्यूटी जॉइन करने के बाद वह और मजबूत हो गए. उन्होंने भ्रष्टाचार रोकने के लिए आईएएस बनने का फैसला किया और तैयारी शुरू कर दी. इसी क्रम में उन्होंने साल 2021 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली. उनकी 683वीं रैंक आई थी और दिव्यांग कोटे से साल 2022 में आईएएस बने. बतौर आईएएस उनकी पहली पोस्टिंग मथुरा में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई. फिर वह शाहजहांपुर में जॉइन मजिस्ट्रेट बने और यहां वकीलों के सामने उठक बैठक लगाने के बाद उन्हें रेवेन्यू बोर्ड से अटैच कर दिया गया था.
