6 हजार की दवा 18 हजार में! मरीज ने CM से की शिकायत, KGMU के डॉक्टर सस्पेंड
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मरीजों को कथित रूप से बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. जांच रिपोर्ट के आधार पर नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है, जबकि विभागाध्यक्ष और ओटी सिस्टर इंचार्ज से जवाब तलब किया गया है. शिकायत मुख्यमंत्री जनता दर्शन में पहुंचने के बाद जांच कराई गई थी.
राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU से एक बड़ा मामला सामने आया है. आरोप है कि मरीजों को अस्पताल के अधिकृत स्टोर से सस्ती दवाएं और लेंस उपलब्ध होने के बावजूद बाहर से महंगे दामों पर खरीदारी करने के लिए मजबूर किया जा रहा था. शिकायत मुख्यमंत्री जनता दर्शन तक पहुंची तो जांच बैठी और अब जांच रिपोर्ट के आधार पर नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है.
इतना ही नहीं विभागाध्यक्ष से जवाब तलब किया गया है और एक बाहरी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी शुरू हो गई है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल KGMU में मरीजों के साथ कथित आर्थिक शोषण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री जनता दर्शन कार्यक्रम में की गई एक शिकायत के बाद हुई जांच के आधार पर की गई है.
किसने की थी शिकायत?
शिकायत गोरखपुर के एक मरीज ने की थी, जिसने आरोप लगाया था कि उसे विश्वविद्यालय के HRF स्टोर से दवाएं और लेंस लेने के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदारी करने को कहा गया. मरीज का आरोप था कि बाहर से खरीदी गई दवाओं और लेंस पर उसे करीब 18 हजार रुपये खर्च करने पड़े, जबकि वही सामग्री KGMU के अधिकृत स्टोर पर लगभग 5 से 6 हजार रुपये में उपलब्ध थी. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अनुशासन समिति का गठन किया और पूरे मामले की जांच कराई.
17 मरीजों ने दिए थे सबूत
जांच के दौरान समिति ने मरीजों के रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया और खरीदारी से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया. KGMU के प्रवक्ता प्रोफेसर केके सिंह के मुताबिक, जांच समिति ने कुल 30 मरीजों के मामलों की समीक्षा की. इनमें से 17 मरीजों ने लिखित बयान और खरीदारी के दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनसे यह पुष्टि हुई कि उन्हें अस्पताल के बाहर से दवाएं और लेंस खरीदने के लिए कहा गया था. जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्हें प्रशासन ने गंभीर अनियमितता माना है.
एफआईआर भी दर्ज होगा
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ. रिपोर्ट के अनुसार OPD से मरीजों को कुछ निजी मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाने के लिए एक बाहरी व्यक्ति सक्रिय रूप से काम कर रहा था. आरोप है कि यह व्यक्ति मरीजों को अस्पताल परिसर से बाहर ले जाकर विशेष दुकानों से दवाएं और लेंस खरीदवाता था. प्रशासन ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया है. मामले की आंच विभाग के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंची है.
सिस्टर इंचार्ज और विभागाध्यक्ष को भी नोटिस
ऑपरेशन थिएटर की सिस्टर इंचार्ज और विभागाध्यक्ष को भी नोटिस जारी किया गया है. दोनों से पूछा गया है कि विभाग में निगरानी व्यवस्था और मरीजों की आवाजाही पर नियंत्रण को लेकर पर्याप्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यदि समय पर निगरानी होती तो ऐसी शिकायतें सामने नहीं आतीं. KGMU प्रशासन ने साफ किया है कि मरीजों के हितों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.