आयुष्मान कार्ड पर भी लूट, बाहरी दवाओं का खेल, 2.5 करोड़ का कैंसर घोटाला, KGMU में घोटाले ही घोटाले

केजीएमयू में दवा घोटाले की लाइन लग गई. नेत्र विभाग से लेकर कार्डियोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग से ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. केजीएमयू प्रशासन ने इन मामलों पर कड़ा एक्शन लिया है. कई डॉक्टरों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है. कई अन्य विभाग भी जांच के दायरे में आ चुके हैं.

केजीएमयू

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में मरीजों के इलाज और सरकारी योजनाओं की दवाओं में कथित अनियमितताओं का सिलसिला लगातार सामने आ रहा है. नेत्र रोग विभाग में बाहरी दवाएं लिखने, कार्डियोलॉजी में एक मरीज को पांच स्टेंट लगाने और यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों के कैंसर दवाओं के घोटाले के मामलों में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है. कई डॉक्टरों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कुछ विभागों में ऑडिट का दायरा बढ़ाया जा रहा है.

नेत्र विभाग का डॉक्टर निलंबित, बाहरी दवाओं का खेल

नेत्र रोग विभाग में मरीजों को बाहर से दवा, लेंस और उपकरण खरीदने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया. जांच कमेटी की सिफारिश पर डॉक्टर संजीव गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है. जांच में 30 मरीजों की जानकारी ली गई, जिनमें से 17 मरीजों ने बयान दर्ज कराए और सबूत भी जमा किए. मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर के कहने पर ओपीडी में अब्बास नाम का कर्मचारी उन्हें तय मेडिकल स्टोर की पर्ची थमाता था. आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों से हजारों रुपये वसूले गए.

एक मरीज ने बताया कि गलत आंख की रिपोर्ट बनाकर ऑपरेशन का दबाव बनाया गया और 21 हजार रुपये की दवाएं-लेंस बाहर से मंगवाए गए. दूसरे मरीज से आंख में गैस डालने के नाम पर 9 हजार रुपये लिए गए, लेकिन गैस नहीं डाली गई. गोरखपुर के एक मरीज ने मुख्यमंत्री दरबार में शिकायत की, जिसके बाद पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित हुई.

विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉक्टर अपजीत कौर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि विभाग में बाहरी व्यक्ति अब्बास वर्षों से कैसे घुसता रहा. ओटी सिस्टर इंचार्ज चेतना के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है. अब्बास के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

कार्डियोलॉजी विभाग-एक मरीज को पांच स्टेंट, जांच शुरू

केजीएमयू के कार्डियोलॉजी विभाग में एक ही मरीज को पांच स्टेंट लगाने का मामला सुर्खियों में आने के बाद कुलपति डॉक्टर नित्यानंद ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है. समिति में डीन डॉ. केके सिंह, डॉक्टर संतोष कुमार और वित्त नियंत्रक समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं. शुरुआती जांच में 15 मरीजों का ब्योरा जुटाया गया है. सभी आयुष्मान योजना के तहत भर्ती थे. इन मरीजों को कुछ दिनों के अंतराल पर भर्ती कर स्टेंट व अन्य प्रक्रियाएं कराई गईं. समिति एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी रिपोर्ट और स्टेंट लगाने की चिकित्सीय जरूरत की विस्तृत जांच करेगी.

यूरोलॉजी विभाग- 2.5 करोड़ का कैंसर दवा घोटाला

सबसे बड़ा घोटाला यूरोलॉजी विभाग में सामने आया है. असाध्य रोग योजना के तहत पंजीकृत मरीजों के यूएचआईडी नंबरों का दुरुपयोग कर महंगी कैंसर दवाओं की कथित कालाबाजारी का मामला उजागर हुआ. जांच में पाया गया कि विभाग में खरीदी गई दवाओं का करीब 90% कैंसर की दवाएं थीं. शिकंजा कसते ही विभाग की अलमारी से 15 लाख रुपये की दवाएं बरामद हुईं. ये दवाएं कोल्ड चेन का पालन किए बिना रखी गई थीं, जिससे उनका उपयोग संदिग्ध हो गया है.

कुल घोटाले की राशि करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है. फर्जी मरीजों के नाम पर दवाएं मंगाई गईं और वास्तविक मरीजों तक नहीं पहुंचीं. यूरो के एचओडी अतुल गुप्ता को हटा दिया गया है. इसके अलावा तीन कर्मचारियों को निलंबित किया है और मुकदमा भी दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई

जांच का दायरा बढ़ा, सात विभागों में ऑडिट

यूरोलॉजी घोटाले के बाद प्रशासन ने सात कैंसर संबंधी विभागों में दवा खरीद, आपूर्ति और भुगतान का ऑडिट शुरू कर दिया है. इनमें रेडियोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, इंडोक्राइन सर्जरी और स्त्री रोग विभाग शामिल हैं. रेडियोथेरेपी विभाग से शुरुआत कर बिल-बाउचर, स्टॉक रजिस्टर, मरीजों के यूएचआईडी और भुगतान दस्तावेजों की जांच की जा रही है.केजीएमयू प्रवक्ता डॉक्टर केके सिंह ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है. निगरानी में आई कमजोरियों पर भी गौर किया जा रहा है.

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