पहले खतौनी की जांच, फिर होगी रजिस्ट्री; सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री में धोखाधड़ी रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले खतौनी की जांच अनिवार्य होगी. इससे विवादित या गिरवी रखी जमीनों के फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और मुकदमेबाजी कम होगी. सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंजूर इस प्रस्ताव से संपत्ति खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी.
उत्तर प्रदेश में जमीनों की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी रोकने और खरीदने-बेचने वालों को मुकदमेबाजी से बचाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के तहत किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले खतौनी की जांच की जाएगी. देखा जाएगा कि बेची जा रही जमीन कहीं गिरवी या विवादित तो नहीं है. इस संबंध में मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पर विचार करने के बाद मंजूरी दे दी गई है.
संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए इस प्रस्ताव को बेहत महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. इसके तहत रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा. इससे फर्जी दस्तावेज से या विवादित जमीनों की रजिस्ट्री को रोका जा सकेगा. यह जानकारी स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने दी. उन्होंने बताया कि ऐसे काफी मामले सामने आए हैं, जिसमें संपत्ति का मालिक कोई और है और उसे किसी अन्य व्यक्ति ने बेच दिया है.
लगातार बढ़ रही मुकदमेबाजी
मंत्री के मुताबिक इसके अलावा निषेधित या प्रतिबंधित संपत्योंति का विक्रय, अपने अधिकार से अधिक संपत्ति का विक्रय, कुर्क संपत्ति का विक्रय तथा केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के विक्रय विलेख के भी पंजीकरण के मामले सामने आए हैं. इसकी वजह से विवाद उत्पन्न होती है और लोगों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस तरह की दिक्कतों के समाधान के लिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.
अधिनियम में जुड़ेंगी नई धाराएं
रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अंतर्गत किसी भी विलेख के पंजीकरण से इनकार करने के संबंध में उप-निबंधक को धारा 35 के तहत अभी बहुत सीमित अधिकार हैं. ऐसे में कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है. लेकिन लगातार आ रही समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्रेशन अधिनियम और नियमावली में संशोधन किया जाएगा. प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम में धारा 22 और धारा 35 के बाद नई धारा 22-A, 22-B और 35-A जोड़ी जाएंगी.
सब रजिस्टार को मिलेंगे ये अधिकार
संशोधन के बाद धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाई जा सकेगी. धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं. वहीं धारा 35-A(1) के अनुसार यदि धारा 17(1) के अंतर्गत आने वाली अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे, तो उन्हें रजिस्ट्री से रोका जा सकेगा.