फायर सेफ्टी के शपथ पत्र पर पास होगा नक्शा, लखनऊ अग्निकांड के बाद जागा LDA

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद एलडीए ने फायर सेफ्टी को लेकर सख्त कदम उठाए हैं. अब एकल आवासीय (लो-राइज) भवनों को छोड़कर सभी आवासीय और व्यावसायिक भवनों का नक्शा पास कराने के लिए भवन स्वामी को नोटरीकृत फायर सेफ्टी शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा. यह नियम कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स, अस्पताल, होटल, कोचिंग सेंटर और बहुमंजिला परियोजनाओं पर लागू होगा.

भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला

लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है. इस हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब एकल आवासीय (लो-राइज) भवनों को छोड़कर सभी आवासीय और व्यावसायिक भवनों का नक्शा पास कराने के लिए भवन स्वामी को अग्नि सुरक्षा व्यवस्था संबंधी नोटरीकृत शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा.

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के आदेश के अनुसार, जिन भवनों के लिए अग्निशमन विभाग (फायर विभाग) की एनओसी अनिवार्य नहीं है, वहां भी न्यूनतम फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा. इसके लिए भवन स्वामियों को यह शपथ पत्र देना होगा कि उन्होंने भवन में आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपाय किए हैं. एलडीए मुख्यालय में ऐसे शपथ पत्रों का अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा और इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट एलडीए सचिव को सौंपी जाएगी.

किन भवनों पर लागू होगा नियम?

नया नियम बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं, व्यवसायिक भवनों, कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स, होटल, अस्पताल और नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर, जिम, भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठान पर लागू होगा. हालांकि, एकल आवासीय (लो-राइज) भवनों को इससे बाहर रखा गया है. एलडीए ने सभी जोनल अधिकारियों को व्यापक जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. विशेष रूप से उन भवनों की जांच होगी, जहां बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है.

बड़े पैमाने पर जांच अभियान

जांच के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था, बेसमेंट का उपयोग, पार्किंग व्यवस्था, भवन का वास्तविक उपयोग, सुरक्षा मानकों का पालन, अवैध निर्माण और बेसमेंट के दुरुपयोग पर कार्रवाई होगी. एलडीए ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के बने भवनों, बेसमेंट के अवैध उपयोग और फायर सेफ्टी मानकों का पालन न करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा जिन भवनों का मानचित्र आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था.

अलीगंज अग्निकांड के बाद जागा प्रशासन

लेकिन उनमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, उन्हें भी चिन्हित किया जाएगा. मास्टर प्लान के विपरीत उपयोग पाए जाने पर संबंधित भवन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. गौरतलब है कि अलीगंज स्थित जिस इमारत में आग लगी थी, वह रिकॉर्ड में आवासीय भवन थी लेकिन उसमें व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं. इस हादसे के बाद एलडीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं. कई अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है.

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