लग्जरी कार, 50 कर्मचारी, फोन रखने की पाबंदी… लखनऊ में ठगी का ‘कॉर्पोरेट मॉडल’

लखनऊ में दो ठग प्रेम प्रकाश ठगी का कार्पोरेट मॉडल चला रहा था. वे लग्जरी कारों से आते थे छात्रों के माता-पिता को अपने झांसे में लेते थे और उनसे लाखों रुपये ऐंठ कर चले जाते थे. इस ठगी को अंजाम देने के लिए उन्होंने एक ऑफिस खोल रखा था, जिसमें 50 कर्मचारी काम करते थे.

लखनऊ में ठगी का 'कॉर्पोरेट मॉडल

लखनऊ पुलिस ने बिहार से ताल्लूक रखने वाले दो ऐसे ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने देशभर में तकरीबन 100 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया है. ये ठग अच्छे मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर छात्रों के माता-पिता को गुमराह कर लाखों रुपये ऐंठते थे. फिर उनके बच्चों का एडमिशन भी नहीं कराते थे और रफूचक्कर हो जाते थे. इन्होंने लखनऊ में ही 1.26 करोड़ की ठगी की थी तबसे ही पुलिस के रडार पर थे.

यूपी पुलिस ने दोनों ठग के आरोपी प्रेम प्रकाश विद्यार्थी उर्फ अभिनव शर्मा और उसके साथी संतोष कुमार को बुधवार यानी 26 नवंबर को चिनहट के कठौता झील के पास से गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक ये बदमाश इतने शातिर थे कि 10 मिनट बात करने पर ही छात्रों के माता-पिता को अपने झांसे में आ जाते थे. फिर क्या पैरेंट्स अपने बच्चों के भविष्य के लिए कुछ सोचे-समझे लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते थे. लखनऊ में इन्होंने ‘स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी’ नाम से एक लग्जिरियस ऑफिस भी खोल रखा था.

कर्मचारियों को नहीं रखने देता फोन

लखनऊ में इन्होंने जो ऑफिस खोला था, उसमें तकरीबन 50 कर्मचारी काम करते थे. ऑफिस में कोई भी कर्मचारी अपना फोन नहीं रखता था. क्लाइंट आने पर प्रेम प्रकाश खुद लग्जरी कार से आता, काउंसलिंग करता और चला जाता. इसी ठगी के जरिए उसने औरंगाबाद में 5 करोड़ का घर, बनारस और बिहार में भी करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीद लीथी . लखनऊ में ज्वैलरी में भारी निवेश किया. उसके घर में इम्पोर्टेड लक्जरी आइटम की भरमार है.

स्कूल फ्रेंचाइजी के नाम पर भी लोगों से ठगे करोड़ों

प्रेम प्रकाश हर बार ठगी के नए-नए तरीके अपनाता था. इसने कई शख्स को पटना और वाराणसी में डीपीएस जूनियर प्रेप स्कूल की फ्रेंचाइजी देने का लालच दिया. प्रमोशन के लिए पटना में फिल्म स्टार गोविंदा और वाराणसी में प्रीति जिंटा को चीफ गेस्ट बनाकर बुला डाला. इसके झांसे और ग्लैमर में फंस कर 70 लोगों ने 3-3 लाख रुपये फ्रेंचाइजी फीस के तौर पर दे दिए. इसने उनसे यूनिफॉर्म, रीडिंग मटेरियल के नाम पर भी लाखों ऐंठ लिए। कोई स्कूल आज तक नहीं खुला. लेकिन आजतक कोई स्कूल नहीं खूल पाया.

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रेम प्रकाश ने किया है बीटेक

प्रेम प्रकाश ने मथुरा के जीएलए यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. कॉलेज के दिनों में ही 2011 से एडमिशन कराकर मोटा कमीशन कमाने लगा. नौकरी की, लेकिन कम सैलरी से खुश नहीं था. फिर पूरी तरह ठगी के धंधे में कूद पड़ा. उसने ठगी के लिए जो पैटर्न अपनाया उसके तहत अलग-अलग शहरों में कंसल्टेंसी खोलता, 5-7 करोड़ ठगता और ऑफिस बंद करके फरार हो जाता.

जेल में मिले संतोष नाम के कैदी को अपनी गैंग में किया शामिल

बिहार पुलिस ने 2019 में प्रेम प्रकाश को मेडिकल एडमिशन ठगी के मामले में गिरफ्तार किया था. बेउर जेल में 6 साल की सजा काटते हुए इसने एक अन्य कैदी संतोष कुमार को भी अपने गैंग में शामिल किया. फिर इसने संतोष की जमानत करवा दी और उसके सहारे अपना धंधा चलाने लगा. वह संतोष को 30 हजार रुपये महीना और हर ठगी पर कमीशन देता था.

2024 में बिहार पुलिस की अभिरक्षा से हो गया था फरार

सितंबर 2024 में सहारनपुर कोर्ट में पेशी के लिए लाए गए प्रेम प्रकाश ने शामली रेलवे स्टेशन के पास बिहार पुलिस की अभिरक्षा से ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था. फरार होने के बाद संतोष से आधार कार्ड लिया. उसे एडिट करके अपना फर्जी आधार बनवाया. फिर छोटे-छोटे होटलों में छिपकर रहने लगा. इसी दौरान लखनऊ में नया ऑफिस खोलकर फिर ठगी शुरू कर दी. इसके खिलाफ लखनऊ के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में मुकदमे दर्ज हैं.

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