ATS का बड़ा खुलासा, दुबई में बैठा आकिब हिंदू नेताओं की हत्या का बना रहा था प्लान
एटीएस सूत्रों के अनुसार साकिब के मोबाइल और बैंक खातों से जो डेटा मिला है, उससे साफ हो गया है कि उसे हिंदू नेताओं की हत्या, रेल हादसों जैसे आतंकी कार्यों के लिए विदेश से फंडिंग मिल रही थी. इस पूरी साजिश को दुबई में बैठकर आकिब नाम का शख्स प्लान कर रहा था.
मेरठ के संदिग्ध आतंकी साकिब की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी हैंडलर और दुबई में छिपे आकिब के इशारे पर हिंदूवादी नेताओं को निशाना बनाने की बड़ी साजिश रची जा रही थी. विवादित बयान देने वाले इन नेताओं की रेकी के लिए साकिब ने हैदराबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ तक का दौरा किया था. अब एटीएस ने पूरे मॉड्यूल को ध्वस्त करने के लिए दुबई में बैठे आकिब के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है और उसके पासपोर्ट को निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.
एटीएस सूत्रों के अनुसार साकिब के मोबाइल और बैंक खातों से जो डेटा मिला है, उससे साफ हो गया है कि उसे हिंदू नेताओं की हत्या, रेल हादसों जैसे आतंकी कार्यों के लिए विदेश से फंडिंग मिल रही थी. मनी ट्रेल की जांच में कई बैंक खातों का इस्तेमाल सामने आया है. एक साल पहले साकिब हैदराबाद गया था, जहां उसने एक बड़े हिंदूवादी नेता की दिनचर्या और गतिविधियों की पूरी जानकारी अपने हैंडलर को भेज दी थी.
मौका मिलने पर हथियार भेजने का था वादा
हैंडलर ने साकिब बताया था कि सही मौका मिलते ही हथियार भिजवा दिए जाएंगे. एटीएस अधिकारियों ने बताया कि साकिब का काम सिर्फ रेकी तक सीमित नहीं था. वह विवादित बयान देने वाले हिंदूवादी नेताओं को खासतौर पर टारगेट कर रहा था. पूछताछ में उसके साथी अरबाब, लोकेश और विकास के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं. इनके मोबाइल से संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और लोकेशन डेटा मिलने के बाद संबंधित राज्यों की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है. इसके अलावा शामली के चार युवकों से भी एटीएस पूछताछ कर रही है, जिनके इस मॉड्यूल से लिंक होने की आशंका जताई जा रही है.
फरार हुआ आकिब
सबसे अहम खुलासा यह है कि साकिब को पाकिस्तानी हैंडलर से मिलवाने का जिम्मा दुबई में रह रहे आकिब का था. अब आकिब फरार है और एटीएस ने उसकी तलाश तेज कर दी है. सूत्र बताते हैं कि आकिब न सिर्फ फंडिंग का जरिया था, बल्कि पूरा ऑपरेशन दुबई से संचालित हो रहा था .यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साकिब और उसके साथी सिर्फ हत्याओं की प्लानिंग नहीं कर रहे थे, बल्कि देश में अराजकता फैलाने के लिए बड़े स्तर पर आतंकी गतिविधियां अंजाम देने की तैयारी में थे. एटीएस की इस कार्रवाई ने न सिर्फ कई बड़े हिंदूवादी नेताओं की जान बचाई है, बल्कि साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की साजिश को भी समय रहते नाकाम कर दिया है.
