कभी थे ‘उत्तराधिकारी’, अब मायावती की नजर में ‘अपरिपक्व’… क्या करेंगे आकाश आनंद?
बसपा में आकाश आनंद की भूमिका को लेकर एक बार फिर असमंजस बढ़ गया है. मायावती ने ऑल इंडिया बैठक में साफ कहा कि आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति है, लेकिन अभी उनमें राजनीतिक परिपक्वता की कमी है, इसलिए उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. आकाश को दिसंबर 2023 में मायावती ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन इसके बाद उन्हें कई बार जिम्मेदारियों से हटाया गया. 2026 में यूपी चुनाव से पहले उनकी दोबारा सक्रियता बढ़ी और हाथरस-नोएडा में रैलियां हुईं. अब मायावती के ताजा बयान से सवाल उठ रहा है कि क्या आकाश अब भी उनके उत्तराधिकारी हैं?
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर आकाश आनंद की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जिस आकाश आनंद को कभी मायावती ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, वही आकाश अब मायावती की नजर में बड़ी जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. बसपा की ऑल इंडिया बैठक में मायावती ने साफ कहा कि आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति है, लेकिन उन्हें अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है, इसलिए फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.
खास बात ये है कि कुछ ही समय पहले आकाश आनंद को फिर से पार्टी में अहम भूमिका दी गई थी और यूपी में चुनावी सक्रियता बढ़ाई गई थी. हाथरस और नोएडा में उनकी रैलियों के बाद मायावती का ये बयान कई सवाल खड़े कर रहा है. बसपा में आकाश आनंद की सियासी पारी एक बार फिर असमंजस के दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है. मायावती ने एक तरफ उन्हें पार्टी में काम करने की इजाजत दी है, लेकिन दूसरी तरफ साफ कर दिया कि अभी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी. यानी आकाश पार्टी से बाहर नहीं हैं… लेकिन पार्टी के फैसलों के केंद्र में भी नहीं हैं.
दो बार पद से हटाए गए आकाश आनंद
आकाश आनंद को 10 दिसंबर 2023 को मायावती ने पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाने के साथ अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आकाश पार्टी के सबसे प्रमुख युवा चेहरों में नजर आने लगे थे, लेकिन मई 2024 में मायावती ने उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर और उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटा दिया. लोकसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और इसके बाद जून 2024 में आकाश को फिर से नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया, लेकिन ये वापसी भी ज्यादा लंबी नहीं चली.
मार्च 2025 में मायावती ने आकाश को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया और उन्हें पार्टी से भी निष्कासित कर दिया था. उस समय मायावती ने आकाश की राजनीतिक परिपक्वता पर भी सवाल उठाए थे. 2026 में तस्वीर फिर बदली. यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा सक्रिय किया. जुलाई 2026 में उन्हें यूपी की चुनावी तैयारियों और संगठन में अहम भूमिका मिली. इसके बाद अगस्त में आकाश आनंद लंबे अंतराल के बाद यूपी की सियासी जमीन पर उतरे. हाथरस और नोएडा की रैलियों में उन्होंने योगी सरकार पर हमला बोला.
आकाश आनंद की वापसी को बसपा के युवा वोटरों और खासकर नई पीढ़ी के बीच पार्टी को फिर से खड़ा करने की कोशिश के तौर पर देखा गया, लेकिन अब मायावती के ताजा बयान ने इस पूरी रणनीति पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. मायावती के ताजा बयान का सबसे बड़ा संदेश यही है कि आकाश आनंद पार्टी में सक्रिय रह सकते हैं, लेकिन अंतिम राजनीतिक अधिकार अभी भी मायावती के पास ही रहेगा. इससे पहले भी मायावती साफ कर चुकी हैं कि चुनाव में उम्मीदवारों का अंतिम फैसला वही करेंगी. यानी आकाश जनसभाएं कर सकते हैं.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश आनंद अब भी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं?
इस सवाल का जवाब फिलहाल साफ नहीं है, क्योंकि मार्च 2025 में मायावती ने आकाश को हटाते समय कहा था कि उनके रहते और उनकी आखिरी सांस तक पार्टी में कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा. अब 2026 में आकाश को पार्टी में काम करने की अनुमति तो है, लेकिन बड़ी जिम्मेदारी देने से मायावती ने साफ इनकार कर दिया है यानी आकाश आनंद की भूमिका फिलहाल ‘उत्तराधिकारी’ से ज्यादा एक युवा संगठनात्मक और चुनावी चेहरे की बनती दिखाई दे रही है.
2027 से पहले मायावती का बड़ा दांव
बसपा के लिए 2027 का यूपी चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा सिर्फ एक सीट जीत सकी थी और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला. ऐसे में मायावती के सामने दोहरी चुनौती है- एक तरफ अपने पुराने दलित वोट बैंक को मजबूत करना और दूसरी तरफ युवा वोटरों के बीच बसपा की मौजूदगी बढ़ाना. आकाश आनंद इसी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन मायावती का ताजा संदेश ये भी बताता है कि पार्टी की कमान और रणनीतिक नियंत्रण में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं होगी.
अकेले चुनाव लड़ेगी BSP
मायावती ने चुनावी रणनीति को लेकर भी अपना रुख साफ कर दिया है. बसपा यूपी समेत चुनावी राज्यों में किसी गठबंधन के बजाय अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. मायावती का कहना है कि बहुजन समाज के हित और शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाने का मिशन पार्टी के लिए सर्वोपरि है और इस मिशन को पूरा करने के लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है.