मायावती का अशोक सिद्धार्थ पर बड़ा खुलासा, बोलीं- संन्यास न लेने के लिए मुझ पर था दबाव

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को लेकर बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि उनपर संन्यास न लेने को लेकर दबाव था. उन्हें सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में संन्यास की घोषणा करनी पड़ी. बसपा प्रमुख ने विपक्षी दलों के नीले रंग के इस्तेमाल को अंबेडकरवाद का दिखावा बताया.

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो) Image Credit: PTI

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अपने नए सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ को लेकर बड़ा दावा किया है. पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि उन पर राजनीतिक संन्यास न लेने के लिए दबाव डाला जा रहा था, लेकिन परिस्थितियों के चलते उन्हें मजबूरी में संन्यास की घोषणा करनी पड़ी.

मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि जिस दिन उनके बीएसपी से किनारा करने और संन्यास लेने की चर्चा सामने आई, उस दिन भी उन पर काफी दबाव था. उन्होंने दावा किया कि अशोक सिद्धार्थ समेत कुछ लोग उन्हें संन्यास की घोषणा नहीं करने के लिए दबाव डाल रहे थे. मायावती के मुताबिक, पूरी रात उन्हें रोकने के लिए अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाए गए.

बसपा प्रमुख का कहना है कि इसके बावजूद जब हालात ऐसे बने कि ज्यादा देर होने पर और बड़ा नुकसान हो सकता था, तो उन्हें सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में संन्यास की घोषणा करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि सही समय आने पर पार्टी कार्यकर्ताओं को इस पूरे मामले में और भी कई बातें बताई जाएंगी.

कांग्रेस पर भी मायावती का सीधा हमला

मायावती ने बीएसपी से निकाले गए नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बीएसपी से निकाले गए नेता दूसरी पार्टियों में जाकर कोई खास काम नहीं कर सकते. बीएसपी से निकाले गए लोगों को कांग्रेस में शामिल करने से उनको कोई फायदा नहीं होने वाला है.

उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कांग्रेस को ‘डूबता जहाज’ करार दिया. साथ ही सवाल उठाया कि कांग्रेस के जहाज में शामिल होकर कोई अपने राजनीतिक भविष्य को अंधकार में क्यों डालेगा.

‘केवल नीला कपड़े से अंबेडकरवादी नहीं बनेंगे’

मायावती ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा नीले रंग के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बीएसपी का शुरू से चला आ रहा नीला रंग अब दूसरी पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ नीला कपड़ा पहन लेने से कोई अंबेडकरवादी नहीं बन जाता.

उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा बहुजन समाज के मुद्दों पर अलग-अलग रहा है. मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच दलित और पिछड़े वोटों को साधने की कोशिश तेज है. सपा के नीले रंग पर हालिया राजनीतिक गतिविधियों के बीच यह मायावती का डायरेक्ट वार है.

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