आकाश की छुट्टी, ईशान की एंट्री… क्या मायावती को मिल गया नया उत्तराधिकारी?
बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती के छोटे भाई आनंद के छोटे बेटे ईशान आनंद पहली बार पार्टी के आधिकारिक मंच पर नजर आए. मायावती और आनंद कुमार के साथ नीला पटका पहने ईशान की तस्वीर सामने आने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है. खास बात यह रही कि बैठक से मायावती के भतीजे और कभी राजनीतिक उत्तराधिकारी रहे आकाश आनंद नदारद रहे.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर के पद से हटा दिया है. इतना ही नहीं, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से भी आकाश गायब रहे, लेकिन इसी बैठक में पहली बार उनके छोटे भाई ईशान आनंद पार्टी के आधिकारिक मंच पर नजर आए. मायावती और पिता आनंद कुमार के साथ नीला पटका पहने ईशान की तस्वीर सामने आई तो सवाल उठने लगे कि क्या आकाश की जगह ईशान लेंगे?
दरअसल, आज लखनऊ में बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई. मंच पर मायावती थीं. बगल की कुर्सियों पर उनके भाई आनंद कुमार के बगल में ईशान आनंद बैठे थे. पहली बार पार्टी के इस बड़े मंच पर नजर आए ईशान आनंद. नीला पटका पहने ईशान की मौजूदगी ने बसपा की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी, क्योंकि जिस वक्त ईशान की एंट्री हुई… उसी वक्त मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी रहे आकाश आनंद बैठक से नदारद थे.
कभी अंदर, कभी बाहर
आकाश आनंद की बात करें तो उनकी सियासी पारी किसी रोलर कोस्टर से कम नहीं रही. 10 दिसंबर 2023 को मायावती ने आकाश को बसपा का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया और और सबसे बड़ा ऐलान करते हुए उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. इसके बाद आकाश को पार्टी के युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया, लेकिन कुछ ही महीनों बाद तस्वीर बदल गई. मई 2024 में आकाश को बड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया.
आकाश आनंद की फिर वापसी हुई और मार्च 2025 में एक बार फिर आकाश को पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया. 2026 में आकाश की एक बार फिर वापसी हुई. यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हुई. आकाश ने हाथरस और नोएडा में रैलियां कीं. युवा वोटरों को साधने की कोशिश की. लगा कि शायद मायावती ने एक बार फिर आकाश पर भरोसा जताया है, लेकिन अब मायावती ने साफ कर दिया कि आकाश को पार्टी में काम करने की अनुमति है, लेकिन अभी उन्हें और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है और और फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.
पहली बार मंच पर ईशान
यानी आकाश पार्टी में हैं, लेकिन पार्टी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी से दूर हैं और इसी बीच ईशान आनंद की एंट्री ने सवालों को और हवा दे दी है. आकाश के छोटे भाई ईशान हैं. लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट हैं. पहले भी मायावती के जन्मदिन और कुछ संगठनात्मक कार्यक्रमों में नजर आ चुके हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पार्टी का आधिकारिक मंच और मायावती और आनंद कुमार के साथ ईशान का दिखना अलग बात है.
सूत्रों की मानें तो मायावती पार्टी में युवा विंग को लेकर भी बड़ा फैसला कर सकती हैं और इसकी कमान ईशान आनंद को दिए जाने की चर्चा है. अगर ऐसा होता है तो ये ईशान की राजनीति में औपचारिक एंट्री का बड़ा संकेत होगा. इतना ही नहीं दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश को भी युवा विंग में जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है यानी मायावती की नजर अब पार्टी के युवा चेहरों पर है, लेकिन ईशान को उत्तराधिकारी बनाना अभी इससे काफी दूर की बात है.
उत्तराधिकारी नहीं तो फिर क्या?
क्योंकि मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि उनके जीते-जी कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा. ऐसे में ईशान की मौजूदगी को सीधे उत्तराधिकारी की घोषणा मान लेना जल्दबाजी होगी, लेकिन राजनीति में तस्वीरें भी बहुत कुछ कहती हैं और बसपा की राजनीति में मायावती के संकेतों का अपना महत्व है. एक तरफ आकाश… जिन्हें कभी उत्तराधिकारी बनाया गया… बार-बार जिम्मेदारी मिली… बार-बार छीनी गई… दूसरी तरफ ईशान… जो अब धीरे-धीरे पार्टी के बड़े मंच पर दिखाई देने लगे हैं.
और ये पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब यूपी में 2027 का चुनाव सिर पर है. बसपा अपने संगठन को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने कई विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित किए हैं. कई नाम शॉर्टलिस्ट किए जा चुके हैं. मायावती का फोकस संगठन को मजबूत करने और अकेले चुनाव लड़ने पर है. ऐसे में युवा चेहरों की भूमिका बेहद अहम होने वाली है.. फिलहाल मायावती के सामने चुनौती है कि पार्टी के पुराने दलित आधार को वापस कैसे मजबूत किया जाए और नई पीढ़ी को बसपा से कैसे जोड़ा जाए.