शादी के नाम पर राजस्थान में 12-16 साल की लड़कियों बेचते थे, डेढ़ लाख में होता था सौदा, लखनऊ से 4 तस्कर गिरफ्तार
लखनऊ पुलिस ने लड़कियों को शादी के नाम पर राजस्थान में महज डेढ़ लाख रुपये में बेचने वाले 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह पिछले छह वर्षों से सक्रिय था और अब तक 20 से अधिक किशोरियों को बेच चुका है. गिरोह का मुख्य सूत्रधार सोनम और भूपेंद्र चौधरी अभी फरार है.
लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है. गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय किशोरियों को बेहतर जीवन, घूमने-फिरने और अच्छे कपड़ों का लालच देकर फंसाता था. फिर उन्हें राजस्थान ले जाकर ‘शादी’ के नाम पर बेच देता था.पुलिस ने बुधवार देर रात अतरौली क्रॉसिंग के पास से गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया. इनमें एक महिला, दो पुरुष और एक 17 वर्षीय बाल अपराधी शामिल हैं. आरोपियों की निशानदेही पर दो चार पहिया वाहन भी बरामद किए गए हैं.
गिरफ्तार आरोपी
- अनुराग यादव- रायबरेली, मिल एरिया, परेपड़क कोडरस बिजूर
- अख्तर -रायबरेली गुरुबक्शगंज, कोरिहर सताव
- प्रिया पटेल उर्फ शीला -रायबरेली, भदोखर, पूरे भोला मेजरगंज
- एक 17 वर्षीय बाल अपराधी
कैसे हुआ खुलासा?
12 मई को मोहनलालगंज के गनियार गांव निवासी कमलेशा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 16 और 12 वर्षीय नातिनों को रिश्तेदारी का एक लड़का और उसकी सहयोगी बहला-फुसलाकर ले गए हैं. डीसीपी दक्षिणी आर. वसंत कुमार के निर्देशन में चार पुलिस टीमों ने 24 दिनों तक लगातार छानबीन की. 150 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई.18 मई को दोनों किशोरियों को सकुशल बरामद कर लिया गया. पूछताछ में बच्चों ने जो खुलासा किया, उससे पुलिस हैरान रह गई. लड़कियों ने बताया कि उन्हें राजस्थान ले जाकर शादी के नाम पर बेचने की तैयारी चल रही थी.
गिरोह का मॉडस ऑपरेंडी
इंस्पेक्टर मोहनलालगंज बजेश त्रिपाठी के अनुसार, पूछताछ में एक आरोपी प्रिया पटेल ने बताया कि वर्ष 2020 में उसकी मुलाकात राजस्थान के कोटा निवासी सोनम और उसके पति भूपेंद्र चौधरी से हुई थी. इसके बाद उसने किशोरियों की तलाश शुरू कर दी.कमजोर परिवार की लड़कियों को लालच दिया जाता था. उन्हें रायबरेली लाया जाता था. नए कपड़े पहनाए जाते और आकर्षक तस्वीरें खींची जाती थी. तस्वीरें राजस्थान भेजी जाती थीं. सौदा तय होने पर लड़कियों को वहां ले जाकर बेच दिया जाता था. आरोपियों ने स्वीकार किया कि एक किशोरी के बदले उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये तक मिलते थे.
छह साल से सक्रिय गिरोह, 20 से ज्यादा शिकार
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह पिछले छह वर्षों से सक्रिय था और अब तक 20 से अधिक किशोरियों को बेच चुका है. रायबरेली की दो सगी बहनों को भी इसी गिरोह ने कुछ समय पहले राजस्थान में बेच दिया था. राजस्थान के मुख्य सूत्रधार सोनम और भूपेंद्र चौधरी अभी फरार है. पुलिस उनकी तलाश कर रही है. साथ ही गिरोह के पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और संभावित पीड़िताओं की पहचान के लिए जांच जारी है.